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झारखंड : रांची में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की समीक्षा, कहा हथियार छोड़ें नक्सली

Updated at : 12 May 2018 6:47 AM (IST)
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झारखंड : रांची में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की समीक्षा, कहा हथियार छोड़ें नक्सली

नक्सल मामले में झारखंड सरकार ने किया है बेहतर काम, मन में आता है गौरव का भाव रांची : झारखंड मंत्रालय में शुक्रवार को नक्सल और पिछड़े जिलों की समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नक्सली हथियार छोड़ें, सरकार बातचीत को तैयार है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने […]

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नक्सल मामले में झारखंड सरकार ने किया है बेहतर काम, मन में आता है गौरव का भाव
रांची : झारखंड मंत्रालय में शुक्रवार को नक्सल और पिछड़े जिलों की समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नक्सली हथियार छोड़ें, सरकार बातचीत को तैयार है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा : हमलोग सुरक्षाबलों द्वारा नक्सलियों का खात्मा करने के पक्षधर नहीं हैं. नक्सलियों को मुख्य धारा में लाना सरकार का मकसद है.
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रघुवर सरकार की पीठ थपथपायी. कहा : झारखंड सरकार काफी अच्छा काम कर रही है. नक्सल समस्या के मामले में राज्य सरकार का काम देश में बेहतरीन है. काफी कम समय में उम्मीद से ज्यादा सफलता प्राप्त की गयी है. गृह मंत्री होने के नाते गौरव का भाव मन में आता है. इसके लिए रघुवर दास की सरकार की जितनी प्रशंसा की जाये कम है.
उन्होंने कहा : राज्य पुलिस विशेष तौर पर बधाई के पात्र है. राज्य सरकार ने सीआरपीएफ के लिए जो आधारभूत संरचना उपलब्ध करायी है, वह श्रेष्ठ है. इन सब चीजों से दिखता है कि राज्य सरकार नक्सल समस्या को समाप्त करने के लिए कितनी गंभीर है. बैठक में उन्होंने सूचना तंत्र के मामले में राज्य में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करने की सलाह दी, कहा : इससे काम में तेजी आयेगी. केंद्र सरकार हर संभव सहयोग करेगी.
नार्थ इस्ट में चार साल में उग्रवाद खत्म हो गया. नक्सल घटनाओं में भी चार सालों में काफी कमी आयी है.उग्रवादियों के आर्थिक तंत्र पर हो रहा सख्त प्रहार: एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा : नक्सलियों और उग्रवादियों के आर्थिक तंत्र पर सुरक्षा एजेंसियां सख्त कार्रवाई कर रही हैं. यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा. चतरा में उग्रवादियों के मजबूत आर्थिक तंत्र की खबर प्रभात खबर ने 24 और 25 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की थी.
राज्य में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करने की दी सलाह, कहा, सहयोग करेगा केंद्र
सभी पुलिसकर्मियों का होगा बीमा
पहले नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात पुलिस बलों का ही जीवन बीमा कराया जाता था. लेकिन अब प्रदेश के सभी जिलों के पुलिसकर्मियों का बीमा कराया जायेगा. इस पर केंद्र की मंजूरी मिल गयी है.
कश्मीर पर बोले
कश्मीर पर गृहमंत्री ने कहा : सीज फायर का कोई प्रस्ताव वहां की राज्य सरकार ने नहीं भेजा है. वहां की सरकार प्रस्ताव भेजेगी, तो विचार किया जायेगा. पत्थरबाजी में कश्मीर में पर्यटक की मौत पर गृहमंत्री ने कहा : इससे वहां के लोग दुखी हैं. कुछ लोग हैं, जो माहौल को खराब करना चाहते हैं. लेकिन उनके मंसूबे हो पूरा होने नहीं दिया जायेगा. उन्होंने कहा : अमरनाथ यात्रियों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की जायेगी. इसके लिए एहतियाती कदम उठाये गये हैं.
गुमला, खूंटी, सिमडेगा व चाईबासा के विकास पर जोर

बैठक में क्या हुआ : 1247 मोबाइल टावर स्थापित किये जाने का अनुरोध
रांची : केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की नक्सल मामलों की समीक्षा बैठक में अति नक्सल प्रभावित चार जिलों गुमला, खूंटी, सिमडेगा और चाईबासा के विकास पर जोर दिया गया. बैठक में इन जिलों के डीसी ने चलाये जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी. केंद्रीय गृह मंत्री ने बूढ़ा पहाड़ और सारंडा में चल रहे ऑपरेशन की भी जानकारी ली. आवश्यक निर्देश भी दिये. बैठक में पत्थलगड़ी के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. राज्य सरकार की ओर से इसके लिए उठाये गये कदम की जानकारी दी गयी.
पेश किया गया पावर प्रेजेंटेशन : बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव प्रवीण विशिष्ट ने नक्सल प्रभावित राज्यों का खाका पावर प्रेजेंटेशन के जरिये पेश किया. राज्य सरकार की ओर से गृह विभाग के अधिकारी ने पावर प्रेजेंटेशन के जरिये बताया कि किस तरह से प्रदेश में नक्सल अभियान चल रहा है और इसका परिणाम क्या आया है. साथ ही अति नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों काे आगे बढ़ाने में किस तरह से विभिन्न विभागों की ओर से योगदान दिया जा रहा. राज्य सरकार ने बैठक में 1247 मोबाइल टावर स्थापित करने का अनुरोध किया.
फिर से मांगा गया एक्शन प्लान : केंद्रीय गृह मंत्री को बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के तहत 21 जिले आैर 16 अति नक्सल प्रभावित जिलों को आधार मान कर तीन वर्षों का एक्शन प्लान मांगा गया था. इसके बाद एक्शन प्लान बना कर अनुमोदन के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया था. लेकिन अब कहा जा रहा है कि संशोधित मापदंड के अनुसार फिर से एक्शन प्लान भेजा जाये.
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