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झारखंड : राज्यसभा की दो सीटों के लिए रस्साकशी शुरू, रघुवर-हेमंत की फिर परीक्षा

Updated at : 24 Feb 2018 1:59 PM (IST)
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झारखंड : राज्यसभा की दो सीटों के लिए रस्साकशी शुरू, रघुवर-हेमंत की फिर परीक्षा

मिथिलेश झा @ रांची देश में चुनाव आयोग ने राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों का एलान कर दिया है.16 राज्य में राज्यसभा की 58 सीटों के लिए चुनाव होना है. इसके साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां सेट करनी शुरू कर दी है. सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ विरोधी दल भी जल्द ही मैदान में […]

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मिथिलेश झा @ रांची

देश में चुनाव आयोग ने राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों का एलान कर दिया है.16 राज्य में राज्यसभा की 58 सीटों के लिए चुनाव होना है. इसके साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां सेट करनी शुरू कर दी है. सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ विरोधी दल भी जल्द ही मैदान में ताल ठोंकना शुरू कर देंगे. झारखंड में भी दो सीटों पर चुनाव होना है. झारखंड में वर्ष 2016 में हुए राज्यसभा चुनावों के जैसे परिणाम सामने आयेंगे या सत्ता और विपक्ष के बीच एक-एक सीट का बंटवारा होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि झारखंड की आवाज उठाने वाला कोई कांग्रेस नेता राज्यसभा में नहीं होगा.

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झारखंड से इस वक्त प्रदीप बलमुचु राज्यसभा में कांग्रेस के झारखंड से एकमात्र सांसद हैं. 3 मई, 2018 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उम्मीद बहुत कम है कि कांग्रेस राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगी, क्योंकि उसके पास संख्या बल बेहद कम है. प्रदेश में महज 6 विधायक वाली पार्टी कांग्रेस की मजबूरी होगी कि वह मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को अपना समर्थन दे. झामुमो के 19 विधायक हैं. ऐसे में उसकी दावेदारी अधिक मजबूत है.

वर्ष 2016 के राज्यसभा चुनाव में रघुवर दास सरकार की रणनीति के आगे मात खा चुके झामुमो नेता हेमंत सोरेन भी इस बार फूंक-फूंक कर कदम रखेंगे. सत्ताधारी दल से नाराज चल रहे दलों के साथ-साथ अन्य छोटी पार्टियों से भी सहयोग लेने की हेमंत सोरेन इस बार कोशिश करेंगे, ताकि वह पिछले चुनावों में मिली हार का बदला ले सकें और सरकार की किरकिरी हो.

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दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पहले से ही छोटी पार्टियों पर डोरे डालने शुरू करदिया है. चुनाव की तिथियों के एलान से पहले ही उन्होंने शुक्रवार को चाईबासा में भ्रष्टाचार के आरोपों में सजा भुगत चुके मधु कोड़ा को अपना आदमी बता दिया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि मधु कोड़ा सीधे-सादे आदिवासी हैं. उन्हें कांग्रेस और झामुमो ने मिलकर फंसा दिया. ज्ञात हो कि मधु कोड़ा भाजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे और कांग्रेस एवं झामुमो के सहयोग से राज्य के मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया था.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि झारखंड में भाजपा के सबसे ज्यादा 43 विधायक हैं. उसे सुदेश महतो की पार्टी आजसू के 6 विधायकों का समर्थन हासिल है. इस तरह भाजपा को अपने एक प्रत्याशी को राज्यसभा भेजने में कोई दिक्कत नहीं आयेगी. यदि सत्ताधारी गंठबंधन दोनों सीटों पर अपना प्रत्याशी देता है, तो एक बार फिर चुनावी मुकाबला रोचक हो जायेगा.

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दरअसल, भाजपा के पास एक प्रत्याशी को राज्यसभा भेजने के लिए पर्याप्त संख्या बल है. उसके दूसरे प्रत्याशी की जीत तभी होगी, जबवहविपक्षमेंफुट डालने में कामयाब होयाफिर क्रॉस वोटिंग हो. झामुमो के पास विधानसभा में 19 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस के 6, झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक (जेवीएम पी) के दो, भाकपा माले के एक, मार्क्सिस्ट को-ऑर्डिनेशन के एक, झारखंड पार्टी के एक और जेबीएसपी के एक सदस्य के समर्थन का उसे भरोसा है.

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