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बजट में रघुवर दास से मांग : खाद्य सुरक्षा कानून में पारदर्शिता लायें, जनकल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ायें

Updated at : 17 Jan 2018 1:27 PM (IST)
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बजट में रघुवर दास से  मांग : खाद्य सुरक्षा कानून में पारदर्शिता लायें, जनकल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ायें

रांची : झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले ‘भोजन का अधिकार अभियान’ ने मांग की है कि जनहित में चल रही कुछ योजनाओं में लोगों को मिलने वाली सुविधाएं बढ़ायी जायें. मुख्यमंत्री रघुवर दास को लिखे एक पत्र में इस संगठन ने कहा है कि जनवितरण प्रणाली, आंगनबाड़ी केंद्रों, मातृत्वहक, सामाजिक सुरक्षा […]

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रांची : झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले ‘भोजन का अधिकार अभियान’ ने मांग की है कि जनहित में चल रही कुछ योजनाओं में लोगों को मिलने वाली सुविधाएं बढ़ायी जायें. मुख्यमंत्री रघुवर दास को लिखे एक पत्र में इस संगठन ने कहा है कि जनवितरण प्रणाली, आंगनबाड़ी केंद्रों, मातृत्वहक, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कई मांगों के साथ सरकार से शिकायत भी की गयी है. पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत जवाबदेही एवं पारदर्शिता के प्रावधानों (सामजिक अंकेक्षण, शिकायत निवारण के लिए मानदंड इत्यादि) का क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है. उसकी मांग है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लिए वार्षिक बजट की कुल राशि का कम से कम 1% पारदर्शिता एवं जवाबदेही के प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए आवंटित किया जाये.

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संगठन ने मांग की है कि पीडीएस दुकानों से लाभुकों को दाल एवं तेल भी उपलब्ध करवाया जाये. पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 12(f) में इसका उल्लेख है. संगठन ने कहा है कि छत्तीसगढ़, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश में ऐसा किया जा रहा है.

भोजन का अधिकार अभियान की एक और मांग है. उसका कहना है कि अंडा पोषक आहार है. स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन योजना में अंडा को शामिल करने के सफल परिणाम सामने आये हैं. इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए सप्ताह में कम से कम तीन दिन अंडे का प्रावधान किया जाये. साथही गर्भवती एवं धात्रि महिलाओं के लिए भी अंडा की व्यवस्था की जाये.

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संगठनका कहना है कि 6,000 रुपये प्रति शिशु का मातृत्वहक सभी महिलाओं का अधिकार है. झारखंड सरकार यह सुनिश्चित करे कि यह पूरी राशि सभी महिलाओं को सभी बच्चे के लिए अविलम्ब मिलना शुरू हो जाये. इतना ही नहीं, वृद्धाएवं विधवा पेंशन की राशि में भी वृद्धि करने की संगठन ने मांग की है. उसका कहना है कि महंगाई के इस जमाने में 600 रुपये में महीने भर गुजारा कर पाना बेहद कठिन है.

इसलिए इस राशि को बढ़ाकर कम से कम दोगुनाकिया जाये और लाभुकों का दायरा भी बढ़ायाजाये. इस संगठन ने कहा है कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लाभुकों को हर महीने की सात तारीख को पेंशन की राशि मिल जाये, ताकि उन्हें बार-बार बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें. संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है बजट में ऐसा प्रावधान करें किपेंशनकी राशि न्यूनतम मजदूरी के आधे से कम नहीं हो.

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मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र पर भोजन का अधिकार अभियान के संगठन के बलराम, अशर्फी नन्द प्रसाद, अनन्या साहा, ज्यां द्रेज, बबीता सिन्हा , जेम्स हेरेंज, जवाहर मेहता, धीरज कुमार, सिराज दत्ता, आकाश रंजन, संगीता, इनायत आदि ने हस्ताक्षर किये हैं. भोजन का अधिकार अभियान विभिन्न व्यक्तियों एवं संगठनों का एक नेटवर्क है, जो खाद्य सुरक्षा पर कार्य कर रहे हैं. अशर्फी नन्द प्रसाद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी.

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