कोयला घोटाला : झारखंड के पूर्व CM मधु कोड़ा पर 13 दिसंबर को कोर्ट सुनायेगा फैसला

Published at :11 Dec 2017 12:26 PM (IST)
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कोयला घोटाला : झारखंड के पूर्व CM मधु कोड़ा पर 13 दिसंबर को कोर्ट सुनायेगा फैसला

रांची : कोयला घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और अन्य आरोपियों पर फैसला 13 दिसंबर को आयेगा. कोयला घोटाले के एक मामले में इन सभी के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआई कोर्ट अपना फैसला 13 […]

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रांची : कोयला घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और अन्य आरोपियों पर फैसला 13 दिसंबर को आयेगा. कोयला घोटाले के एक मामले में इन सभी के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआई कोर्ट अपना फैसला 13 दिसंबर को सुनासकतीहै. कोर्ट ने सभी आरोपियों को फैसला सुनाये जाने की तारीख पर कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया है.

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झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड को आवंटन में कथित अनियमिताओं में ये लोग आरोपी हैं. मधु कोड़ा, एचसी गुप्ता और कंपनी के अलावा, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एके बसु, बसंत कुमार भट्टाचार्य, बिपिन बिहारी सिंह, वीआईएसयूएल के निदेशक वैभव तुलस्यान, मधु कोड़ा के कथित करीबी सहयोगी विजय जोशी और चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन कुमार तुलस्यान भी इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल हैं.

मुकदमे की सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कहा था कि कंपनी ने आठ जनवरी, 2007 को राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन किया. कोर्ट में लंबे अरसे तक चली सुनवाईमें सीबीआई ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने वीआईएसयूएल को कोल ब्लॉक आवंटन करने की अनुमति नहीं दी थी. स्क्रीनिंग कमेटी ने आरोपित कंपनी को कोयला खदान आवंटित करने की सिफारिश की थी.

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सीबीआई ने यह भी कहा कि कमेटी के अध्यक्ष एचसी गुप्ता ने कोयला मंत्रालय का प्रभार भी देख रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कथित तौर पर इन तथ्यों को छुपाया कि झारखंड सरकार ने वीआईएसयूएल को कोयला खदान आवंटन करने की सिफारिश नहीं की थी.

ज्ञात हो कि पटियाला हाउस कोर्ट ने धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) 409 (सरकारी कर्मचारियों का किया गया आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज मामले का संज्ञान लिया था और इसके बाद उन्हें आरोपी के तौर समन किया गया था.

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