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चिटफंड कंपनियों द्वारा अरबों रुपये का गबन : झारखंड हाइकोर्ट ने कहा, जांच के लिए सीबीआइ को इतने संसाधन देने हैं, तो क्यों न एसआइटी से जांच करायें

Updated at : 11 Oct 2017 7:39 AM (IST)
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चिटफंड कंपनियों द्वारा अरबों रुपये का गबन : झारखंड हाइकोर्ट ने कहा, जांच के लिए सीबीआइ को इतने संसाधन देने हैं, तो क्यों न एसआइटी से जांच करायें

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को चिटफंड कंपनियों द्वारा निवेशकों के जमा अरबों रुपये के गबन करने काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ से जानना चाहा कि चिटफंड कंपनियों के घोटाले की जांच का क्या […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को चिटफंड कंपनियों द्वारा निवेशकों के जमा अरबों रुपये के गबन करने काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ से जानना चाहा कि चिटफंड कंपनियों के घोटाले की जांच का क्या आधार है? वह यह कैसे तय करती है कि चिटफंड कंपनियों के खिलाफ किन मामलों की जांच करनी है व किसकी जांच नहीं करनी है?

उसका मापदंड क्या है? खंडपीठ ने यह भी कहा कि जब राज्य सरकार सीबीआइ को इतना संसाधन देगी, तो एसआइटी से क्यों नहीं चिटफंड घोटाले की जांच करायी जाये? सुनवाई के दाैरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि आये दिन साइबर क्राइम होते हैं. खंडपीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि साइबर क्राइम का जाल विदेशों तक फैला है. यह एक इंटरनेशनल क्राइम है. खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि साइबर क्राइम को रोकने के लिए क्या राज्य में विशेषज्ञों की विंग काम कर रही है? पीूठ ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने सीबीआइ को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने को कहा, ताकि समय पर जांच पूरी हो सके. मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.

159 केस का अनुसंधान हो रहा : सीबीआइ ने शपथ पत्र दायर कर बताया कि चिटफंड कंपनियों के खिलाफ 159 केस का अनुसंधान किया जा रहा है. पहले 25 केस की जांच शुरू की गयी. बाद में आैर 134 केस हाथ में लिया. शेष 79 मामलों की जांच सीबीआइ नहीं कर सकती है. जांच के लिए 61 सदस्यीय विशेष टीम बनायी गयी है. डीआइजी, दो एसपी इसका नेतृत्व कर रहे हैं. जांच के लिए सीबीआइ को एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर, कांस्टेबल सहित अन्य मानव संसाधन, वाहन, कंप्यूटर, भवन आदि की जरूरत है. राज्य सरकार से उपलब्ध कराने की मांग की गयी है. सीबीआइ के अनुरोध पर राज्य सरकार ने अभी कोई उत्तर नहीं दिया है. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने खंडपीठ को बताया कि चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सीबीआइ कई मामलों की जांच नहीं करना चाहती है.
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