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पार्किंग के लिए पैसे वसूलते हैं, लेकिन वाहन की चोरी हुई, तो जिम्मेदारी नहीं ?

रांची: राजधानी में दिनों दिन बढ़ रहे जाम को देखते हुए रांची नगर निगम ने मेन रोड में पार्किंग की नयी व्यवस्था बहाल की है, जिसे ‘स्मार्ट पार्किंग पॉलिसी’ का नाम दिया गया है. इसके तहत मेन रोड में पार्किंग शुल्क वसूलने का जिम्मा बेंगलुरु की कंपनी जीनॉस्टिक सॉल्यूशन काे दिया गया. कंपनी ने व्यवस्था […]

रांची: राजधानी में दिनों दिन बढ़ रहे जाम को देखते हुए रांची नगर निगम ने मेन रोड में पार्किंग की नयी व्यवस्था बहाल की है, जिसे ‘स्मार्ट पार्किंग पॉलिसी’ का नाम दिया गया है. इसके तहत मेन रोड में पार्किंग शुल्क वसूलने का जिम्मा बेंगलुरु की कंपनी जीनॉस्टिक सॉल्यूशन काे दिया गया. कंपनी ने व्यवस्था संभालते ही मेन रोड का पार्किंग शुल्क में चारगुना तक बढ़ा दिया.

कंपनी के साथ किये गये एग्रीमेंट में यह प्रावधान किया गया है कि अगर किसी का वाहन पार्किंग स्थल से चोरी हो जाये या गायब हो जाये, तो इसके लिए पार्किंग का ठेकेदार नहीं, बल्कि स्वयं वाहन का मालिक जिम्मेदार होगा. कंपनी की ओर से पार्किंग की जो रसीद लोगों को दी जाती है, उस पर बाकायदा यह लिखा होता है कि वह केवल पार्किंग के लिए स्पेस उपलब्ध कराती है. नगर निगम के इस फैसले पर शहर के जागरूक लोग भी सवाल उठा रहे हैं.
पैसे वसूलते हैं, तो जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते
नगर निगम की इस पार्किंग व्यवस्था पर शहरवासियों का कहना है कि जब वे पार्किंग शुल्क देते हैं, तो वाहन के रख रखाव की जिम्मेदारी भी पार्किंग के ठेकेदार की होनी चाहिए. कंपनी वाहन मालिकों को जो स्पेस उपलब्ध कराने की बात कर रही है, वह तो नगर निगम का है. उसे तो केवल पार्किंग व्यवस्था संभालने का जिम्मा दिया गया है, यानी पार्किंग में जब तक वाहन खड़ा, तब तक उसकी निगरानी भी उसे ही करनी होगी. वह अपनी जवाबदेही से कैसे बच सकती है? नयी व्यवस्था के तहत कंपनी के कर्मचारी सड़क पर खड़े वाहनों को जब्त भी करते हैं. अगर इन कर्मचारियों के नियत में ही कोई खोट हुआ और उन्होंने ही किसी बाइक को गायब करवा दिया, तो वर्तमान नियमों के मुताबिक वाहन आॅनर कंपनी पर भी किसी प्रकार का दवाब नहीं दे सकता है.
मेयर-डिप्टी मेयर ने दिया है आदेश
रांची नगर निगम के बोर्ड की पिछली बैठक में मेयर आशा लकड़ा और डिप्टी मेयर मेयर संजीव विजयवर्गीय ने निगम के इस नये नियम पर सवाल उठाये थे. मेयर-डिप्टी मेयर ने कहा था कहा कि जब कोई व्यक्ति पार्किंग का शुल्क देता है, तो वाहन के रख रखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होनी चाहिए.
हम लोगों से पार्किंग स्पेस उपलब्ध कराने की एवज में पार्किंग शुल्क लेते हैं. वाहन के रख-रखाव व देखरेख की जिम्मेदारी हमारी नहीं है. वैसे भी पूरे भारत में यह सिस्टम कहीं नहीं है.
अजय कुमार, संचालक, जीनॉस्टिक सोल्यूशन
अगर ठेकेदार पार्किंग पर खड़े वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं लेगा, तो उसे पार्किंग शुल्क वसूलने का अधिकार क्या है? जनता क्या केवल पैसा देने के लिए है? निगम के अधिकारी भी इस पर गंभीर नहीं है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.
संजीव विजयवर्गीय, डिप्टी मेयर
Prabhat Khabar Digital Desk
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