जमीन के बदले नौकरी नहीं मिलने पर रैयतों ने कोलियरी बंद कराने की दी चेतावनी

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उरीमारी सयाल डी परियोजना में जमीन के बदले नौकरी नहीं मिलने पर रैयतों ने कोलियरी बंद करने की चेतावनी दी है. प्रबंधन ने समाधान के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है.

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उरीमारी (रामगढ़): सयाल डी परियोजना अंतर्गत सौंदा बस्ती की 29.75 एकड़ जमीन के बदले लंबित नियोजन के मामले को लेकर सर्वदलीय बैठक हुई. बैठक में प्रभावित रैयतों, जनप्रतिनिधियों, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक की अध्यक्षता एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार ने की. बैठक में कहा गया कि जमीन के बदले नियोजन का मामला लंबे समय से लंबित है. जमीन से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक रोजगार नहीं मिलने से उनमें नाराजगी है. रैयतों ने मामले का जल्द निष्पादन करने की मांग की.

प्रबंधन ने एक सप्ताह में समाधान का दिया आश्वासन

बैठक में प्रबंधन ने रैयतों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया. जीएम रंजय सिन्हा ने मामले के समाधान के लिए एक सप्ताह का समय मांगा. उन्होंने कहा कि मामले को सीएमडी स्तर पर रखा जाएगा और एक सप्ताह के अंदर समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा.

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समाधान नहीं हुआ तो काम ठप कराने की चेतावनी

रैयतों ने प्रबंधन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मामले का समाधान नहीं हुआ, तो कोलियरी का कामकाज ठप करा दिया जायेगा. नेताओं ने कहा कि जमीन के बदले नौकरी रैयतों का अधिकार है. जरूरत पड़ने पर रैयतों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा. बैठक में जीएम (ऑपरेशन) दिलीप कुमार, आशुतोष मिश्रा, पीओ नवीन सिंह, एडी कुमार, जेएलकेएम के केंद्रीय सचिव विजय साहू, अनुज कुमार, अशोक साव, विनोद साव, रामसतो प्रसाद, विजय कुमार, पवन कुमार, दशरथ साव, राम प्रवेश साव, विशाल कुमार समेत अन्य उपस्थित थे.


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डॉ. सलाउद्दीन

लेखक के बारे में

By डॉ. सलाउद्दीन

डॉ. सलाउद्दीन पिछले 30 वर्षों से प्रभात खबर के साथ निष्पक्ष, जनसरोकार और जमीनी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। उनकी उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए झारखंड सरकार की पत्रकारिता फैलोशिप से सम्मानित किया गया।

प्रभात खबर के 40 वर्ष पूरे होने पर प्रकाशित स्मारिका में जनसरोकार आधारित पत्रकारिता करने वाले चुनिंदा पत्रकारों में उन्हें विशेष स्थान मिला। झारखंड राज्य गठन के बाद प्रथम मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह की विशेष कवरेज, हजारीबाग में महिलाओं के शराबबंदी आंदोलन, दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा की रिपोर्टिंग तथा झारखंड स्थापना दिवस विशेषांक में लगातार दो वर्षों तक सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार पर शोधपरक रिपोर्टिंग उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।

राजनीति और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों में उनकी विशेष रुचि रही है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने अनेक केंद्रीय नेताओं, सामाजिक आंदोलनकारियों, राष्ट्रीय खिलाड़ियों और फिल्मी हस्तियों के साक्षात्कार लिए हैं तथा महत्वपूर्ण समाचारों का व्यापक संकलन किया है। प्रभात खबर में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने बड़ी संख्या में युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन किया। उनके मार्गदर्शन में तैयार कई पत्रकार आज देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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