स्मार्ट मीटर लगाने में बंगाल सुस्त, 2.07 करोड़ उपभोक्ता में 2.91 प्रतिशत ही मीटर लगे

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स्मार्ट मीटर लगाते टेक्नीशियन.

Smart Meter West Bengal: पश्चिम बंगाल में 2.07 करोड़ स्वीकृत स्मार्ट मीटर में से केवल 6 लाख लगे हैं. विद्युत मंत्रालय से मिली जिलेवार जानकारी के आधार प देखिये क्या है नवंबर 2027 का नया टार्गेट.

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Smart Meter West Bengal: पश्चिम बंगाल में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम बेहद सुस्त गति से चल रहा है. राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में इसका खुलासा हुआ है. पता चला है कि राज्य में 2.07 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं. इनमें से महज 2.91 प्रतिशत उपभोक्ताओं के घरों में ही स्मार्ट मीटर लगे हैं.

602982 स्मार्ट मीटर ही अब तक लगे

संसद के उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद विश्वजीत सिन्हा (राहुल सिन्हा) ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) के एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी है. मंत्रालय ने बताया है कि राज्य में स्वीकृत 2,07,17,969 (लगभग 2.07 करोड़) उपभोक्ता स्मार्ट मीटरों में से 30 जून 2026 तक केवल 6,02,982 (2.91 फीसदी) मीटर ही लगाये जा सके हैं.

40.35 लाख मीटर का ही दिया गया टेंडर

विद्युत राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक ने संसद में जो आंकड़े पेश किये, उसके मुताबिक, कुल स्वीकृत 2,10,35,262 स्मार्ट मीटरों (उपभोक्ता, डीटी और फीडर मिलाकर) के मुकाबले राज्य ने शुरुआती चरण में केवल 40,35,262 स्मार्ट मीटरों के ही अनुबंध (Contracts) आवंटित किये हैं.

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स्मार्ट मीटर की प्रगति (30 जून 2026 तक)

  • उपभोक्ता मीटर (Consumer Meters): स्वीकृत 2,07,17,969 के मुकाबले 37,17,969 आवंटित किये गये. इनमें से सिर्फ 6,02,982 (2.91 प्रतिशत) लगाये गये.
  • डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DT) मीटर : स्वीकृत 3,05,419 में से 86,772 (28.41 प्रतिशत) स्थापित किये गये.
  • फीडर मीटर (Feeder Meters): स्वीकृत 11,874 के मुकाबले 11,917 (100 फीसदी) मीटर लगाकर लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है.

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उत्तर 24 परगना और नदिया बेस्ट, कई जिलों में 1 फीसदी से भी कम काम

आरडीएसएस योजना के तहत जिलों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखा गया है.

  • उत्तरी 24 परगना (24 PGS North): इस जिले ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वीकृत 17,00,280 कंज्यूमर मीटरों में से 3,02,711 (17.80 प्रतिशत) स्थापित कर लिया है.
  • नदिया (Nadia): स्वीकृत 11,00,554 मीटरों में से 85,285 (7.75 फीसदी) मीटर लगाकर दूसरे स्थान पर है.
  • झारग्राम (Jhargram): 4.21 प्रतिशत प्रगति के साथ राज्य के औसत से बेहतर है.
  • पिछड़े जिले : दक्षिण 24 परगना (0.72 प्रतिशत), दक्षिण दिनाजपुर (0.79 प्रतिशत), कलिम्पोंग (0.76 प्रतिशत), मालदा (0.85 प्रतिशत), हुगली (0.92 प्रतिशत), हावड़ा (1.36 प्रतिशत) और बीरभूम (1.25 प्रतिशत) जैसे जिलों में उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने की रफ्तार 1 फीसदी के आसपास या उससे भी नीचे है.

वर्ल्ड बैंक फंडेड प्रोजेक्ट की स्थिति

आरडीएसएस के अलावा, राज्य सरकार द्वारा विश्व बैंक (World Bank) की वित्तीय सहायता से 4.8 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं. इनमें से 30 जून 2026 तक 77,760 मीटर स्थापित किये जा चुके हैं. इसमें विधाननगर क्षेत्र में 2,88,713 मीटर लगाने का टार्गेट है, इसके मुकाबले अब तक 42,401 (14.69 फीसदी) और हुगली क्षेत्र में 1,92,077 का लक्ष्य है और अब तक 35,359 (18.41 फीसदी) मीटर लगाये गये हैं.

नवंबर 2027 तक का नया लक्ष्य

केंद्रीय बिजली मंत्री ने मई 2026 में पश्चिम बंगाल का दौरा किया था. इस दौरान राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि वर्तमान में जितने भी स्मार्ट मीटरों (40.35 लाख) के ठेके आवंटित किये जा चुके हैं, उनका शत-प्रतिशत काम नवंबर 2027 तक पूरा कर लिया जायेगा.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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