20 बागी सांसदों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जायेगी तृणमूल कांग्रेस, करेगी सदस्यता रद्द करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी.
West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने वाले 20 लोकसभा सांसदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए अगले 7-10 दिनों में पार्टी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है. अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से जतायी नाराजगी.
West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए अपने 20 बागी लोकसभा सदस्यों के खिलाफ ममता बनर्जी गुट उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है. पार्टी के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर पार्टी बागी सांसदों की लोकसभा सदस्यता दलबदल रोधी कानून के तहत रद्द कराने के लिए शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर कर सकती है.
ओम बिरला से मिले थे अभिषेक बनर्जी
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी लंबित याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला सुनाने का आग्रह किया था. इसके साथ ही पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट जाने की भी तैयारी शुरू कर दी है.
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लोकसभा अध्यक्ष को दिया अल्टीमेटम
अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि यदि लोकसभा अध्यक्ष न्यायिक निर्देशों और तय समय-सीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लेते हैं, तो पार्टी शीर्ष अदालत का रुख करने के लिए मजबूर होगी.
- टीएमसी ने सबसे पहले जून में इस संबंध में याचिकाएं दाखिल की थीं.
- 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में भी इस मुद्दे को उठाया.
- 26 जुलाई को औपचारिक पत्र सौंपने के बाद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ सांसदों सौगत रॉय, कीर्ति आजाद और प्रतिमा मंडल के साथ लोकसभा अध्यक्ष से दोबारा मुलाकात की, लेकिन मानसून सत्र समाप्त होने तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका.
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बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी में हुई थी बगावत
हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी के 28 में से 20 लोकसभा सदस्यों ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विद्रोह कर दिया था. सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय और मिताली बाग जैसे कई वरिष्ठ टीएमसी सांसदों ने छोटे राजनीतिक दल NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया) में अपने गुट के विलय की घोषणा की थी. साथ ही केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठंबधन (NDA) को समर्थन देने का ऐलान किया था.
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10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) का पेच
बागी सांसदों का तर्क है कि वे टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक हैं. इसलिए संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत उन्हें दलबदल रोधी कानून से छूट (Merger Provision) प्राप्त है. हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल टीएमसी गुट ने इस कदम की वैधता को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है. टीएमसी का कहना है कि एकतरफा घोषणा करके सांसद अयोग्यता की कार्रवाई से नहीं बच सकते.
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By मिथिलेश झा
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