BPSC 70th Exam: सीवान के दीपक की 15 साल की तपस्या, कई बार मिली हार फिर भी नहीं टूटा हौसला, वीडियो में जानिए पूरी कहानी

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गरीबों की पीड़ा देखकर अधिकारी बनने का सपना देखने वाले दीपक ने 15 साल के अथक संघर्ष के बाद BPSC 70th परीक्षा में सफलता हासिल की है. उनकी यह प्रेरणादायक कहानी हार न मानने और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने की शक्ति दर्शाती है.

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BPSC 70th Exam : सिवान के दीपक की सफलता की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. साल 2011 से शुरू हुआ संघर्ष 2026 में जाकर मंजिल तक पहुंचा. इस दौरान दीपक कई बार BPSC की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में महज एक-दो अंकों से पीछे रह गए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. 15 साल की मेहनत, धैर्य और लगातार तैयारी के बाद अब उनका चयन ग्रामीण विकास अधिकारी के पद पर हुआ है.

गरीबों की परेशानी देखकर अधिकारी बनने का लिया संकल्प

दीपक के अधिकारी बनने की कहानी के पीछे एक खास वजह भी है. उन्होंने अपने माता-पिता और दूसरे गरीब लोगों को सरकारी दफ्तरों में परेशान होते देखा था. ब्लॉक कार्यालय में कई बार गरीब लोग डरे-सहमे बाहर खड़े रहते थे और अपनी बात रखने के लिए इंतजार करते थे.

इसी दृश्य ने दीपक के मन पर गहरा असर डाला. उन्होंने तय किया कि अगर कभी अधिकारी बने, तो सबसे पहले उन लोगों की बात सुनेंगे जो अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय की खिड़की के पास खड़े रहते हैं. उनके लिए अधिकारी बनना सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि उन लोगों की मदद करना था जिनकी आवाज अक्सर दब जाती है.

पिता और भाई ने मजदूरी कर पढ़ाई का खर्च उठाया

दीपक बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं. उनके पिता और भाई लकड़ी का काम यानी कारपेंटरी करते थे. परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद दीपक के भाई ने अपनी मेहनत की कमाई से उनकी पढ़ाई और तैयारी का खर्च उठाया.

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दीपक ने पटना और दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. हर दिन करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा. परीक्षा में बार-बार असफलता मिली, लेकिन तैयारी कभी नहीं रुकी.

असफलता के दौर में उनकी मां ने भी उनका हौसला बनाए रखा. उन्होंने कभी दीपक पर सफलता के लिए दबाव नहीं बनाया. मां हमेशा यही कहती थीं कि आज नहीं होगा तो कल होगा. यही भरोसा दीपक को लगातार आगे बढ़ाता रहा.

15 साल बाद मिला मेहनत का फल

2011 से 2026 तक दीपक ने लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना किया. कई बार ऐसा भी हुआ जब वह महज एक या दो अंकों से परीक्षा में सफल होने से चूक गए. इतनी लंबी असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा.

आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. BPSC परीक्षा के बाद उनका चयन ग्रामीण विकास अधिकारी के पद पर हुआ. मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया है. अब दीपक प्रशिक्षण के लिए BIPARD जाएंगे.

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रागिनी शर्मा

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

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