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हथिनी को प्रसव कराने के लिये दो घंटे तक रेलगाड़ी को रोका गया, हथिनी व बच्चा सुरक्षित जंगल की ओर गया

Updated at : 07 Jul 2025 8:31 PM (IST)
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हथिनी को प्रसव कराने के लिये दो घंटे तक रेलगाड़ी को रोका गया, हथिनी व बच्चा सुरक्षित जंगल की ओर गया

रामगढ़ वन प्रमंडल क्षेत्र में एक हथिनी को प्रसव के बाद रेलगाड़ी की चपेट में आने से बचा लिया गया.

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-रामगढ़ वन प्रमंडल क्षेत्र में हाथियों से तीन साल में दस लोगो की मौत, 23 घायल व 1623 मामले फसल, मकान नुकसान का – बोकारो से रामगढ़ बसंतपुर, हजारीबाग चींची कला व रांची सिल्ली से रामगढ़, गोला, बोकारो, पेटरवार हाथी कॉरिडोर सालों भर हाथियों का आना-जाना फोटो फाइल 7आर-11: रेलवे ट्रैक के पास प्रसव के दौरान हथनी, 7आर-12: नवजात हाथी के साथ जंगल की ओर जाती हथनी, 7आर-13: सरवाहा गांव में जमा हाथियों का झुंड, 7आर-14: हाथी कॉरिडोर का नक्शा, 7आर-15: उमेश माझी के नेतृत्व में हाथी को भागने वाली टीम. सलाउद्दीन रामगढ़. रामगढ़ वन प्रमंडल क्षेत्र में एक हथिनी को प्रसव के बाद रेलगाड़ी की चपेट में आने से बचा लिया गया. हथिनी व उसका बच्चा सुरक्षित रास्ते से दस किलोमीटर तक चल कर हाथी कॉरिडोर जंगल में पहुंचाया गया. गांव वाले व वन विभाग के लोग पहली बार रेलवे ट्रैक की उंचाई में चढ़ने के दौरान एक हथिनी को बच्चा देते भी देखा. थोड़ी ही देर में हथिनी व बच्चा दोनों रास्ते पर चलने लगे. यह पूरा वाकया रामगढ़ वन प्रमंडल के सरवाहा चरही गांव के पास का है. पिछले पखवारा में अहले सुबह हाथियों का झुंड बोकारो, बसंतपुर, चींची कला, करगी गांव होते हुए सरवाहा क्षेत्र मेें पहुंचा था. उसी समय एक हथिनी बिछड़ कर हजारीबाग-बरकाकाना रेलवे लाइन सरवाहा गांव के पास पहुंच गयी. रामगढ़ डीएफओ नीतिश कुमार को वन वनरक्षी ने इसकी सूचना दी. डीएफओ ने तत्काल हजारीबाग से बरकाकाना जाने वाले मालगाड़ी को दो घंटे के लिये रुकवा दिया. इसके बाद हथिनी सुरक्षित जब जंगल की ओर चली गयी तब रेल परिचालान फिर से शुरू हुआ. हाथी से मौत, घायल व नुकसान रामगढ़ वन प्रमंडल में हाथी द्वारा जानमाल नुकसान आंकड़ों के अनुसार पिछले 2022-25 तक दस लोगों की मौत हाथी के हमले से हुई है. वन विभाग इन मृतकों के आश्रितों को 41 लाख की राशि भुगतान किया है, जबकि हाथी के हमले में 23 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. वन विभाग ने इन घायलों को 12 लाख 11 हजार रुपये का मुआवजा का भुगतान किया है. 1623 मामले फसल, मकान व पशु को नुकसान पहुंचाने का है. वन विभाग ने तीन साल में 77लाख सात हजार 700 रुपये मुआवजा दिया गया. इन क्षेत्रों में हाथियों का साल भर आना जाना रामगढ़ जिले में हाथियों के प्रवेश के लिये दो कॉरिडोर हे. पहला बोकारो जिले से हाथियों का झुंड बसंतपुर, चींची कला, करगी से एनएच 33 सरवाहा होते हुए बड़कागांव हजारीबाग की ओर आना-जाना रहता है. दूसरा हाथी कॉरिडोर सिल्ली से गोला प्रखंड में प्रवेश करते है. सरगडीह से उपर बरगा क्षेत्र होते हुए औराडीह, संग्रामडीह, चेपादारू से सुतरी रकुआ होते हुए रजरप्पा तक जाते है. हाथियों का झुंड भटकने पर रजरप्पा नदी पार करके पेटरवार महुआ टांड तक जाना होता हे. गोला प्रखंड के गांव व जंगलों में साल के आठ महिने तक हाथियों के झुंड का विचरण होता है. हाथियों से ग्रामीणों के जान माल बचाने के लिये दो प्रायलट प्रोजेक्ट शुरू हाथियों का सबसे अधिक झुंड (42) का अभी तक इस क्षेत्र में आया है, हाथी भागने के कार्य में लगे स्थानीय वन विभाग के टीम के सदस्य औराडीह गोला निवासी उमेश मांझी पिता ओलार मांझी ने बताया कि छोटे-छोटे टोली में हाथियों का झुंड इस क्षेत्र में आना-जाना रहता है. गांव वालों को बचाने के लिये वन विभाग की ओर से हमारे जैसे छह सदस्यीय टीम बनाया गया है. जिसमें लालधन मांझी, विनोद मांझी, गुणा मांझी, रामजीत माझी, सूरजलाल मांझी शामिल है. पूरबडीह वन विभाग कार्यालय में शाम में पांच बजे प्रतिदिन हमलोग जाते है. रात भर मशाल जला कर जिस क्षेत्र में हाथी का आगमन हुआ है तथा हाथी कॉरिडोर से भटके हुए हाथियों को जंगल की ओर भेजने का काम करते है. इस तरह गोला, मांडू, रामगढ़ तीन वन रेंज में ऐसी टीम काम कर रही है. लेकिन वन विभाग अब इस परंपरागत तरीके से हाथियों को जंगल की ओर भेजने के लिये दो पायलट प्रोजेक्ट भी तैयार किया है. नर हाथी के मस्त फेज से रिहायशी इलाकों में नुकसान डीएफओ नीतिश कुमार ने बताया कि प्राकृतिक संरचना के अनुसार नर हाथी को एक समय मस्त फेज से गुजरना होता है. उसी समय नर हाथी अपने झुंड से बिछड़ कर या भाग कर दूसरे हाथियों के झुंड में जाता है. नर हाथी का नये झुंड के हथिनी के साथ संबंध कायम होता है. इस प्राकृतिक प्रक्रिया के पीछे हाथियों के स्वास्थ्य का संबंध हे. हाथी जब बिछड़ता है तो खेतों में भोजन के लिये सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. डीएफओ ने बताया कि हाल के दिनों के अध्ययन से एक तरह के खाना खाने से मन उब जाता है उसी तरह जब हाथी जंगल की बजाय खेतों में पहुंचते है तो धान, मकई, सब्जी व आलू भी उखाड़ कर खाने लगे है. हाथी के नुकसान से बचाव का उपाय डीएफओ ने बताया कि हमार हाथी दो ऐप सभी लोगों को अपने मोबाइल में लोड करना चाहिए. इस ऐप के माध्यम से हाथी के खतरे को कम किया जा सकता है. शौच के लिये हाथी कॉरिडोर वाले रास्ते में नही जायेें. हाथी को देखने के लिये पीछे-पीछे नही चलें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

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