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शिबू सोरेन की बहन की भावुक श्रद्धांजलि- पुलिस से बचने के लिए किसान, साधु के वेश में रहते थे भैया

Updated at : 05 Aug 2025 11:57 PM (IST)
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Shibu Soren Sister Shakuntala Devi

शिबू सोरेन की छोटी बहन शकुंतला देवी (सफेद साजडी में). फोटो : प्रभात खबर

Shibu Soren News: शिबू सोरेन को अंतिम विदाई देने के लिए उनकी छोटी बहन शकुंतला देवी भी रामगढ़ के नेमरा गांव आयीं थीं. उन्होंने अपने भैया को भावुक श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कई ऐसी बातें बतायीं, जो अब तक कोई नहीं जानता. प्रभात खबर में पहली बार पढ़ें गुरुजी से जुड़ी वो खास बातें.

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Shibu Soren News: रामगढ़ के नेमरा गांव से सुरेंद्र/शंकर पोद्दार : दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि संघर्ष, बलिदान और जन आंदोलन की प्रेरणादायक कहानी है. महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन के दौरान जब शासन-प्रशासन ने आदिवासी अधिकारों की आवाज को दबाने की कोशिश की, तब शिबू सोरेन को बार-बार पुलिसिया दमन का सामना करना पड़ा. ऐसे हालात में उन्होंने खुद को बचाने और आंदोलन को जीवित रखने के लिए वेश बदलकर बरलंगा और नेमरा के घने जंगलों और पहाड़ों में छिपना पड़ता था. कभी किसान, तो कभी साधु और कभी महिला का रूप धरकर वे छिपते रहे.

भैया शुरू से साहसी थे, गरीबों के लिए लड़े : शकुंतला देवी

झारखंड आंदोलन के जननायक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन उर्फ गुरुजी के निधन से पूरा झारखंड शोक में डूबा है. इस बीच, गुरुजी की छोटी बहन जैना मोड़ निवासी शकुंतला देवी ने नम आंखों से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. कहा, ‘मेरे भैया शुरू से ही साहसी थे. बचपन में ही उनमें कुछ अलग था. वे कभी अन्याय सहन नहीं करते थे और हर वक्त गरीबों, मजदूरों और आदिवासियों के हक के लिए खड़े रहते थे.’

Shibu Soren ने हमेशा जुल्म के खिलाफ आवाज उठायी

शकुंतला देवी ने कहा कि भैया ने हमेशा जुल्म के खिलाफ आवाज उठायी. चाहे कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अगर गरीबों पर अत्याचार करता था, तो भैया खुलकर उसका विरोध करते थे. शकुंतला देवी ने बताया कि भैया ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए अपनी जिंदगी समर्पित की. हमें हमेशा उनका आशीर्वाद और स्नेह मिला.

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यह क्षण अत्यंत पीड़ादायक – शिबू सोरेन की बहन

शकुंतला देवी ने कहा कि वे बड़े होकर भी हमारे लिए हमेशा वही भैया रहे, जो गांव की गलियों में नंगे पांव भागते थे. उन्होंने भर्राई आवाज में कहा कि गांव और परिवार के लिए यह क्षण अत्यंत पीड़ादायक है. उनके जाने से केवल एक नेता ही नहीं, एक संरक्षक और प्रेरणास्रोत इस दुनिया से चला गया.

नेमरा से पैदल 30 किमी दूर पढ़ने जाते थे

शिबू सोरेन का बचपन अभावों से भरा था, लेकिन शिक्षा की ललक ने उन्हें कभी हारने नहीं दिया. नेमरा गांव से पैदल, नंगे पैर वे 30 किलोमीटर दूर गोला हाई स्कूल पढ़ने जाते थे. पगडंडियों और जंगलों के रास्ते से स्कूल पहुंचना उनके लिए रोज की दिनचर्या थी. उस दौर में संसाधनों की कमी थी, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति अटूट थी. शिबू सोरेन के इस जुझारूपन ने ही उन्हें बाद में झारखंड आंदोलन का चेहरा बनाया.

नेमरा ने नेता नहीं, बेटा खोया…

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की मृत्यु से उनका पैतृक गांव नेमरा शोक में डूबा है. गांव के लोगों के लिए यह किसी नेता की नहीं, अपने घर के बेटे की अंतिम विदाई थी. जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, हर आंख नम हो गयी. अंतिम दर्शन के लिए महिलाएं दरवाजों के बाहर बैठ गयीं. नेमरा गांव के माझी टोला में चूल्हे तक नहीं जले. मातम का ऐसा माहौल था कि हर दिशा में सन्नाटा पसरा था. नेमरा ने सिर्फ एक जननेता नहीं, अपनी माटी का लाल खोया है. यह शून्यता गांव की आत्मा में हमेशा बनी रहेगी.

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नेमरा गांव के पहाड़ और जंगल. फोटो : प्रभात खबर

बरलंगा और नेमरा के जंगल हैं शिबू के संघर्ष के गवाह

स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार वे रात में चुपचाप गांव आते, साथियों से मिलते और फिर वापस जंगलों में चले जाते. उनकी रणनीति, साहस और लोगों से जुड़ाव ही था, जिसने आंदोलन को दबने नहीं दिया. बरलंगा और नेमरा के जंगल आज भी उनके संघर्ष के गवाह हैं. दिशोम गुरु का यह छुपा हुआ पक्ष उन्हें केवल राजनेता नहीं, बल्कि आंदोलन का सच्चा योद्धा बनाता है, जिसकी गूंज पीढ़ियों तक सुनाई देती रहेगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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