पतरातू में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर लगा ब्रेक, विधायक के हस्तक्षेप हफ्ते भर की मोहलत

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पतरातू में पीटीपीएस के घरों को खाली करते लोग. फोटो: प्रभात खबर

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू में हेसला, उचरिंगा और कटिया क्षेत्र में चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान विधायक रोशन लाल चौधरी के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल रोक दिया गया है. 220 एकड़ भूमि खाली कराने की कार्रवाई से सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए. प्रशासन ने एक सप्ताह की मोहलत दी है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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पतरातू से अजय तिवारी की रिपोर्ट

Ramgarh News: रामगढ़ जिले के पतरातू अंचल क्षेत्र में 12 फरवरी से शुरू किया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. प्रशासन ने मौजा हेसला, उचरिंगा और कटिया में स्थित हस्तांतरित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया था. यह भूमि पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस) के औद्योगिक विकास कार्यों के लिए झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) को हस्तांतरित की गई है.

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220 एकड़ जमीन और 1200 घरों पर कब्जा

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पीटीपीएस के पुराने और जर्जर क्वार्टरों सहित लगभग 220 एकड़ क्षेत्र में करीब 1200 आवास और अन्य निर्माणों पर लोगों का अवैध कब्जा है. इससे औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े कई विकास कार्य बाधित हो रहे थे. झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार को भूमि खाली कराने की अनुमति मिलने के बाद अंचल प्रशासन ने अभियान शुरू किया था.

कई स्थानों पर एक साथ चली कार्रवाई

गुरुवार सुबह करीब 9 बजे प्रशासनिक टीम ने पटेल चौक, जनता नगर, मां शीतला मंदिर (टाइप-2, जनता नगर), जल शोध प्रतिष्ठान और बिरसा मार्केट स्थित दुर्गा पूजा स्थल समेत कई इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई. विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में महिला और पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई थी. जैसे ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा, इलाके में अफरा-तफरी मच गई. कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी की. लोगों का कहना था कि अचानक की गई कार्रवाई से वे असहज स्थिति में आ गए हैं.

प्रभावित परिवारों की परेशानी

प्रभावित लोगों ने बताया कि बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं और कई घरों में शादी-ब्याह की तैयारियां जारी हैं. ऐसे समय में घर खाली कराने का आदेश परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गया है. कई परिवारों ने शिकायत की कि उन्हें सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. खासकर, दिहाड़ी मजदूर, ठेला-खुमचा संचालक और निम्न आय वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. उनका कहना है कि रोज कमाने-खाने वाले परिवारों के लिए अचानक घर खाली करना आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा कर देता है.

विधायक के हस्तक्षेप से मिली राहत

अतिक्रमण हटाने की सूचना मिलते ही भाजपा नेता सह बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी हेसला पंचायत पहुंचे. उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर मौजूद अधिकारियों से बातचीत की. विधायक ने कहा कि अल्प समय में हजारों लोगों को बेघर करना उचित नहीं है और प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए. उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी रामगढ़ से चर्चा की और मामला राज्य स्तर तक पहुंचाने की बात कही. जानकारी के अनुसार, विधायक ने इस मुद्दे पर राज्य के मुख्य सचिव को अवगत कराया और रांची जाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की. उन्होंने कम से कम एक सप्ताह का समय देने का आग्रह किया ताकि लोग अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जा सकें और रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें.

फिलहाल अभियान स्थगित

विधायक के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने अभियान को कुछ दिनों के लिए रोक दिया है. शुक्रवार को क्षेत्र में कई लोग छोटे-बड़े वाहनों से अपना सामान हटाते दिखाई दिए. परिवार अस्थायी ठिकानों की तलाश में जुटे हैं. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि औद्योगिक विकास के लिए भूमि खाली कराना आवश्यक है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी.

खटाल संचालकों पर पड़ा असर

इस अभियान का असर खटाल संचालकों पर भी साफ दिख रहा है. कई लोग मजबूरी में अपनी गाय-भैंस औने-पौने दामों में बेचने को विवश हैं. उनका कहना है कि इतने मवेशियों को लेकर वे कहां जाएं, इसकी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. खरीदार भी स्थिति का लाभ उठाकर कम कीमत दे रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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आजीविका की समस्या हो गई खड़ी

हेसला पंचायत की आबादी लगभग 4500 बताई जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर खाली कराने की कार्रवाई पूरी हो जाती है, तो पंचायत का अस्तित्व प्रभावित हो सकता है. वर्षों से यहां रह रहे सैकड़ों परिवारों के सामने आवास और आजीविका की समस्या खड़ी हो गई है. फिलहाल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बातचीत से लोगों को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई फिर से शुरू होने की संभावना बनी हुई है. ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बरकरार है.

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