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अधिकांश मुखिया अपने पास नहीं रखते हैं डिजिटल सिग्नेचर, आदेश की हो रही अवहेलना

Updated at : 11 Jul 2024 9:35 PM (IST)
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अधिकांश मुखिया अपने पास नहीं रखते हैं डिजिटल सिग्नेचर, आदेश की हो रही अवहेलना

अधिकांश मुखिया अपने पास नहीं रखते हैं डिजिटल सिग्नेचर, आदेश की हो रही अवहेलना

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प्रतिनिधि, गिद्दी (हजारीबाग)

सरकारी आदेश के बावजूद डाड़ी प्रखंड के अधिकांश मुखिया अपने पास डिजिटल सिग्नेचर नहीं रख रहे हैं. उनका यह डिजिटल सिग्नेचर डाड़ी प्रखंड मुख्यालय में रहता है, यह नियम के खिलाफ है. उनके डिजिटल सिग्नेचर से चालू वित्तीय वर्ष में प्रखंड मुख्यालय से 15वें वित्त आयोग व मनरेगा कार्यों के लिए अब तक लगभग ढाई करोड़ की निकासी हो चुकी है. प्रखंड के जिम्मेवार पदाधिकारी डिजिटल पंचायत योजना को लेकर गंभीर नहीं है. इसके कारण यहां पर डिजिटल पंचायत को गति नहीं मिल रही है. पंचायती राज निदेशक निशा उरांव ने पिछले मई माह में पत्र जारी कर पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपने पास डिजिटल सिग्नेचर रखने व उपयोग करने का आदेश दिया था. उन्होंने चेतावनी दी है कि मामला संज्ञान में आने पर इसे प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितता के तहत आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. बहरहाल, उनके आदेश का यहां पर पालन नहीं हो रहा है. विकास कार्यों में डिजिटल सिग्नेचर की प्रक्रिया जब से शुरू हुई है, तब से यह प्रखंड मुख्यालय में ही रहता है. कुछ दिन पहले डाड़ी मुखिया लखनलाल महतो व रबोध मुखिया उमेश करमाली ने डिजिटल सिग्नेचर प्रखंड मुख्यालय से ले लिया है. डाड़ी पंचायत भवन में मनरेगा व 15 वें वित्त आयोग से संबंधित ऑनलाइन सेवा व गतिविधि का संचालन शुरू कर दिया गया है. प्रखंड के सभी पंचायत भवनों में मुखिया को तकनीकी सहयोग करने के लिए प्रज्ञा संचालकों को वीएलइ के तौर रखा गया है. उन्हें प्रशिक्षित भी किया गया है. पिछले कई माह से उन्हें प्रत्येक माह मासिक मानदेय मिल रहा है. सभी पंचायतों को डिजिटल पंचायत केंद्र स्थापित कर ग्रामीणों को सभी सुविधाएं देने की योजना सरकार की है. इस दिशा में प्रखंड के मुखिया को जो कदम उठाना चाहिए, वह नहीं उठा रहे हैं. इसके कारण पंचायत डिजिटल नहीं हो पा रही है. चालू वित्तीय वर्ष में 15वें वित्त आयोग तथा मनरेगा से प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में दर्जनों कार्य कराये गये हैं. प्रखंड मुख्यालय में उनके डिजिटल सिग्नेचर से 15वें वित्त से एक करोड़ 10 लाख, मनरेगा से मैटेरियल व मजदूरी के तौर पर एक करोड़ 34 लाख तथा मेठ मिस्त्री के लिए ढाई लाख की निकासी की गयी है. प्रखंड के अधिकांश मुखिया का डिजिटल सिग्नेचर मुख्यालय में ही रहता है, लेकिन पूछने पर वह अपने पास ही होने की कहते हैं. मिश्राइनमोढ़ा पंचायत के मुखिया दासो मरांडी ने कहा कि हमारा डिजिटल सिग्नेचर प्रखंड मुख्यालय में है, लेकिन आज ही उसे ले लेंगे. होन्हेमोढ़ा पंचायत के वीएलइ शिबू कुमार व टोंगी के हीरालाल बेदिया ने कहा कि यहां पर विकास से संबंधित ऑनलाइन कोई कार्य नहीं हो रहा है. बैंकिंग, केसीसी, आधार व अन्य कार्य किये जा रहे हैं.

जानकारी के बाद ही कुछ बता पायेंगे : बीडीओ : बीडीओ अनुप्रिया ने कहा कि प्रखंड के मुखिया डिजिटल सिग्नेचर कहां पर रख रहे हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है. प्रखंड समन्वयक राहुल राज से जानकारी लेने के बाद ही हम इस पर कुछ कह सकते हैं. जिला पंचायती राज पदाधिकारी रजत कुमार कच्छप ने कहा कि मुखिया का डिजिटल सिग्नेचर प्रखंड मुख्यालय में रहता है, तो यह नियम के खिलाफ है. मुखिया को इसे अपने पास रखना व उपयोग करना है. जांच में जो लोग दोषी पाये जायेंगे, उन पर कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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