रामफल आज भी पुकारे जाते हैं सरपंच साहब

रामफल आज भी पुकारे जाते हैं सरपंच साहब चुनाव में दो हजार रुपये खर्च हुए थे फोटो फाइल : 7 चितरपुर बी पूर्व सरपंच रामफल चौधरी चितरपुर.चितरपुर के रामफल चौधरी 1978 में सरपंच पद का चुनाव लड़ा था. उ़न्होंने इस चुनाव में 832 वोट से जीत हासिल की थी. उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव […]
रामफल आज भी पुकारे जाते हैं सरपंच साहब चुनाव में दो हजार रुपये खर्च हुए थे फोटो फाइल : 7 चितरपुर बी पूर्व सरपंच रामफल चौधरी चितरपुर.चितरपुर के रामफल चौधरी 1978 में सरपंच पद का चुनाव लड़ा था. उ़न्होंने इस चुनाव में 832 वोट से जीत हासिल की थी. उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव में लगभग दो हजार रुपये खर्च हुए थे. वे पैदल और कभी – कभी रिक्शा में बैठ कर चुनाव के लिए प्रचार -प्रसार करते थे. उनका चुनाव चिह्न कबूतर छाप था. उन्होंने बताया कि चितरपुर अभी प्रखंड बन चुका है. जबकि उस समय एक पंचायत था. इसके अंतर्गत चितरपुर, मायल, सोंढ़, तेबरदाग, मारंगमरचा, जान्हें गांव आते थे. उन्होंने बताया कि लोगों में उस समय वोट देने का जुनून रहता था. चुनाव के समय एक गांव में एक ही बार बैठक कर निर्णय होता था कि किसको वोट देना है. उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद कई मामलों का निबटारा पंचायत में ही किया जाता था. लोगों को थाना नहीं जाना पड़ता था. उस समय बिहार ग्राम पंचायत एक्ट के अधीनस्थ जितने भी फौजदारी मुकदमे होते थे, उसका निबटारा पंचायत में ही किया जाता था. बताते चले कि 1978 पंचायती चुनाव में रामफल चौधरी ने जमील अहमद को 832 वोटों से पराजित किया था. रामफल चौधरी ने कहा कि आज लोग पैसे के बल पर चुनाव जीत रहे हैं. इसलिए 2011 में वे चुनाव नहीं लड़े. आज राजनीति में काफी बदलाव आ गया है. समाज को आगे ले जाने के लिए आज भी अच्छे लोगों की आवश्यकता है. रामफल चौधरी को समाज में आज भी सरपंच साहब कह कर पुकारा जाता है.
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