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झारखंड विधानसभा चुनाव : बोदू लाल ने खत्म किया था रामगढ़ राजा का वर्चस्व

Updated at : 04 Nov 2019 7:26 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा चुनाव : बोदू लाल ने खत्म किया था रामगढ़ राजा का वर्चस्व

नीरज अमिताभ रामगढ़ : रामगढ़ विधानसभा का पहला चुनाव सन 1951 में ही हुआ था. उस समय इसका पूरा नाम रामगढ़ सह हजारीबाग विधानसभा सीट था. रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में रामगढ़ राज परिवार का खासा प्रभाव था. 1951 से 1967 तक के चुनाव में रामगढ़ राज परिवार का सदस्य या उनकी पार्टी के उम्मीदवार ही […]

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नीरज अमिताभ
रामगढ़ : रामगढ़ विधानसभा का पहला चुनाव सन 1951 में ही हुआ था. उस समय इसका पूरा नाम रामगढ़ सह हजारीबाग विधानसभा सीट था. रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में रामगढ़ राज परिवार का खासा प्रभाव था. 1951 से 1967 तक के चुनाव में रामगढ़ राज परिवार का सदस्य या उनकी पार्टी के उम्मीदवार ही जीतते थे. रामगढ़ राज परिवार के प्रभाव को पहली बार सन 1969 के चुनाव रामगढ़ शहर निवासी स्वर्गीय बोदू लाल अग्रवाल ने तोड़ा था. वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और राज परिवार के प्रत्याशी को हरा दिया.
1969 के चुनाव में पहली बार रामगढ़ राजा की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में रामगढ़ राजा जनता पार्टी के साथ थे. जनता पार्टी के टिकट पर तीन बार के विधायक रहे तारा प्रसाद बक्शी चुनाव लड़े.
वह चौथे नंबर पर रहे. रामगढ़ राज परिवार का वर्चस्व तोड़ कर चुनाव जीता कांग्रेस के टिकट पर लड़े प्रत्याशी बोदूलाल अग्रवाल ने. उस समय कांग्रेस का चुनाव निशान जोड़ा बैल छाप था. लेकिन, बोदूलाल दो साल ही विधायक रहे सके. 1972 के चुनाव में वह भाकपा के मजरूल हसन खान से हार गये. मजरूल हसन खान एक क्रांतिकारी कम्युनिस्ट नेता थे. आंदोलनों में हिस्सेदारी की वजह वह जेल में रह कर चुनाव लड़े और जीते थे. चुनाव जीतने के बाद उनको रिहा किया गया. वह शपथ लेने पटना गये.
लेकिन, विधायक पद की शपथ लेने से पूर्व ही पटना विधायक क्लब में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गयी थी. बाद में हुए रामगढ़ विधानसभा उप चुनाव में मजरूल हसन खान की पत्नी सइदुन निशा विधायक चुनी गयी. हालांकि, अगले 1977 में हुए चुनाव में वह जनता पार्टी के उम्मीदवार विश्वनाथ चौधरी से हार गयी.
1980 के चुनाव में रामगढ़ सीट झामुमो के कब्जे में आ गयी. अर्जुन राम ने यह सीट जीती थी. लेकिन, वह 1985 में जमुना प्रसाद शर्मा से हार गये. 1990 में झामुमो के टिकट पर अर्जुन राम ने दोबारा यह सीट जीती. 1995 में भाजपा के शंकर चौधरी चुनाव जीते. 2000 में सीपीआइ के साबिर अहमद कुरैशी (भेड़ा सिंह) जीते. लेकिन, 2001 में उनकी मृत्यु हो गयी. उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने फरवरी 2001 में रामगढ़ उपचुनाव जीत लिया. 2005 के चुनाव में आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी रामगढ़ सीट से जीत हासिल की थी.
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