जलमीनार में पहुंचा पानी, अब जल्द बुझेगी भुरकुंडा की प्यास

Updated at : 08 May 2019 1:08 AM (IST)
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जलमीनार में पहुंचा पानी, अब जल्द बुझेगी भुरकुंडा की प्यास

पांच हजार घरों में पहुंचेगा पानी भुरकुंडा : लंबे अरसे से पानी के लिए त्राहिमाम कर रहे भुरकुंडा कोयलांचल की प्यास जल्द बुझने वाली है. राज्य सरकार की दामोदर से पानी सप्लाई करने की महत्वाकांक्षी योजना का मंगलवार को सफल परीक्षण हो गया है. सौंदा दोमुहान दामोदर नदी से पटेल नगर जलमीनार के फिल्टर प्लांट […]

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पांच हजार घरों में पहुंचेगा पानी

भुरकुंडा : लंबे अरसे से पानी के लिए त्राहिमाम कर रहे भुरकुंडा कोयलांचल की प्यास जल्द बुझने वाली है. राज्य सरकार की दामोदर से पानी सप्लाई करने की महत्वाकांक्षी योजना का मंगलवार को सफल परीक्षण हो गया है. सौंदा दोमुहान दामोदर नदी से पटेल नगर जलमीनार के फिल्टर प्लांट में पानी पहुंचने लगा है. पानी पहुंचने की सूचना पर आसपास सैकड़ों लोग जमा हो गये.
उल्लास का माहौल था. लोगों की उत्सुकता देखते बन रही थी. अधिकारियों ने बताया कि 10 दिनों के ट्रायल के बाद क्षेत्र में जलापूर्ति शुरू कर दी जायेगी. कोयलांचल में जलापूर्ति समस्या को दूर करने के लिए पटेल नगर व जवाहर नगर में दो जलमीनार का निर्माण हुआ है.
सौंदा दोमुहान दामोदर तट पर पंप हाउस बना है. इसमें सौ एचपी का मोटर पंप लगाया गया है. स्थानीय लोगों ने कहा कि व्यवस्था शुरू हो जाने के बाद उनकी पानी की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जायेगी. विभागीय कर्मियों ने बताया गया कि पटेल नगर फिल्टर हाउस से ही जवाहर नगर स्थित नयी व पुरानी जलमीनार को भी पानी की आपूर्ति होगी. दोनों जलमीनार से लगभग पांच हजार घरों को पानी मिलेगा.
इससे जवाहर नगर, पटेल नगर, सुंदर नगर, भुरकुंडा व कुरसे पंचायत के लोग लाभान्वित होंगे. पटेल नगर में 5.75 लाख व जवाहर नगर में 4.75 लाख लीटर क्षमता की जलमीनार का निर्माण हुआ है. दोनों जलमीनार व पाइप लाइन का काम लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है. घरों तक कनेक्शन व मीटर लगाने का काम भी पूरा किया जा चुका है.
आबादी के लिहाज से नाकाफी है वर्तमान व्यवस्था : भुरकुंडा कोयलांचल क्षेत्र में वर्तमान में सीसीएल व हुरूमगढ़ा स्थित जलमीनार से जलापूर्ति की व्यवस्था है. लेकिन कोयलांचल की आबादी के लिहाज से यह व्यवस्था नाकाफी है. सीसीएल की जलापूर्ति व्यवस्था अक्सर खराब पड़ जाती है. जबकि हुरूमगढ़ा जलमीनार भी बलकुदरा पोखरिया के सूखने के बाद लगभग ठप है. माइनिंग एरिया होने के कारण कोयलांचल में वैकल्पिक जल स्रोत कुआं व चापानल की स्थिति भी अच्छी नहीं रहती है.
पानी का स्तर काफी नीचे चला जाता है. अत्यधिक दोहन के कारण इन्हें भी सूखने में देर नहीं लगती है. पुरानी व्यवस्था के कारण वर्षों से यहां के लोग पानी की समस्या से जूझते रहे हैं. ऐसे में पटेल नगर व जवाहर नगर का नवनिर्मित जलमीनार लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
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