पहाड़ों से मैदानी भाग में आये पशुओं की नहीं बुझ रही प्यास

Updated at : 23 Apr 2019 7:33 AM (IST)
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पहाड़ों से मैदानी भाग में आये पशुओं की नहीं बुझ रही प्यास

रामगढ़ : समय से पहले आये मॉनसून की तपिश, प्रचंड धूप व तेज बह रही गर्म हवाओं ने एक तरफ जहां आम लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है, वहीं लगभग 100 किलोमीटर की दूरी से पानी की तलाश में अपने सैकड़ों मवेशियों के साथ मैदानी भाग में आये पशुपालकों के मवेशियों के हलक पानी […]

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रामगढ़ : समय से पहले आये मॉनसून की तपिश, प्रचंड धूप व तेज बह रही गर्म हवाओं ने एक तरफ जहां आम लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है, वहीं लगभग 100 किलोमीटर की दूरी से पानी की तलाश में अपने सैकड़ों मवेशियों के साथ मैदानी भाग में आये पशुपालकों के मवेशियों के हलक पानी के अभाव में अब भी सूखे हैं.

अपने पशुओं की समय से नहीं बुझती प्यास को लेकर पशुपालक काफी चिंतित हैं. आलम यह है कि मैदानी भाग के सभी ताल, तलैया, नहर व पोखर सब सूख चुके हैं.
जिला प्रशासन द्वारा आम लोगों की प्यास बुझाने को लेकर सात निश्चय के तहत नल जल योजना व पीएचइडी द्वारा क्षेत्र में नये व पुराने चापाकलों की मरम्मत तो चल रहा है.
लेकिन, अप्रैल माह के इस बढ़ती तपिश में क्षेत्र के बधार में घूम रहे इन बेजुबान मवेशियों व वन प्राणियों हिरन, वन सूअर, नीलगाय इत्यादि जीवों की प्यास कैसे बुझेगी.
इस पर न तो प्रशासन संवेदनशील है, न ही राजनीतिक दल के नेता. कुछ वर्षों पूर्व के दिनों पर नजर डालें तो जिला प्रशासन द्वारा भीषण गर्मी व पानी की समस्या से निबटने के लिए जगह-जगह ताल तलैया व नहर में पानी छोड़ा जाता था. इससे मवेशियों व वन्य जीवों की प्यास बुझती थी.
किंतु अब नहरें भी सुखी है. जिस ताल-तलैया में गांव वालों व प्रशासन द्वारा पानी गांव व बधार में लगने वाली आग को बुझाने के लिए रखा जाता था. उसे अधिकतर ताल तलैयों पर ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर उस पर अपने मकान बना लिये हैं.
हालांकि, इस ज्वलंत मुद्दे पर पहले तो प्रशासन की नजर जाती नहीं और अगर जाती भी है तब तक अतिक्रमणकारी उक्त स्थल पर वर्षों पूर्व अपना पक्के का मकान बना लिये होते हैं.
इसे तोड़वा पाना प्रशासन के लिए चुनौती होती है. अधौरा प्रखंड के ताला गांव के पशुपालन रामू बिंद ने बताया कि हम लोगों का जीवन यापन इन्हीं मवेशियों के ऊपर होता है. गर्मी के दिनों में पहाड़ों में अक्सर पानी की समस्या से जूझते हैं. अब तो मैदानी भाग में भी पानी की किल्लत हो गयी है.
ऐसे में हम पशुपालक जाये तो कहां जाये. नुआंव के किसान ललन पांडेय, सिसौड़ा के सुहैल खान व रामगढ़ के मुखिया प्रतिनिधि गौतम खरवार ने कहा कि मनुष्य के साथ इस धरती पर इन प्राणियों को भी जीने का उतना ही अधिकार है, जितना मनुष्यों को. लोगों ने नहर चाट में प्रशासन से पानी की मांग की है.
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