2500 विद्यार्थियों पर मात्र 17 शिक्षक, शौचालय की भी कमी

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2500 विद्यार्थियों पर मात्र 17 शिक्षक, शौचालय की भी कमी

एक्सलेंस विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

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एक्सलेंस विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव रामनरेश तिवारी, पाटन राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय को एक्सलेंस विद्यालय का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है. विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी, चहारदीवारी का अभाव और छात्राओं के लिए शौचालय की समुचित व्यवस्था न होना बड़ी समस्या बनी हुई है. विद्यालय में वर्तमान में करीब 2500 विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनमें 1300 छात्राएं शामिल हैं. इतनी बड़ी संख्या के बावजूद केवल 17 शिक्षकों की ही पदस्थापन की गयी है. इनमें से दो शिक्षक प्रतिनियोजित कर दिये गये हैं. नियम के अनुसार कम से कम 50 शिक्षकों की जरूरत है. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है. विद्यालय परिसर में चहारदीवारी न होने के कारण मवेशी और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. परिसर में गंदगी भी फैलाई जाती है. इससे बच्चों और शिक्षकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. विद्यालय को भवन तो मिल गया है और नया भवन भी बन रहा है. लेकिन उसमें आवश्यक उपस्कर नहीं मिले हैं. ऐसे में बच्चों के बैठने तक की समस्या बनी हुई है. विद्यालय में अनुसेवक तक की नियुक्ति नहीं की गयी है. छात्राओं के लिए शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने से छात्राओं को खासा दिक्कत झेलनी पड़ रही है. व्यवस्था सुधारने के लिए मंत्री को ज्ञापन सौंपा(बॉक्स में) इन समस्याओं को लेकर विद्यालय की ओर से राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर को मांग पत्र सौंपा गया है। इसमें चहारदीवारी, उपस्कर और शिक्षकों की कमी दूर करने का आग्रह किया गया है. इधर विद्यालय की भूमि को लेकर विवाद भी है. कुछ ग्रामीणों ने न्यायालय में मामला दायर किया है, जिसके चलते स्टेडियम निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ. पलामू सांसद विष्णुदयाल राम के प्रयास से पाटन प्लस टू उवि में स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति मिली थी, लेकिन भूमि विवाद के कारण वहां निर्माण नहीं हो सका. इसके बाद उसी राशि से किशुनपुर स्थित हीरानंद लक्ष्मी प्लस टू उवि की भूमि पर स्टेडियम का निर्माण कराया गया. प्रबुद्धजनों का कहना है कि यदि भूमि विवाद का समाधान सामाजिक स्तर पर किया जाता, तो विद्यालय के हित में बेहतर होता. क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है और विद्यालय की समस्याएं बनी रहेगी.ग़ौ2

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Akarsh Aniket

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