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चुनाव की प्रक्रिया सुव्यवस्थित करना ही उद्देश्य : सांसद

Updated at : 31 May 2025 9:21 PM (IST)
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चुनाव की प्रक्रिया सुव्यवस्थित करना ही उद्देश्य : सांसद

शनिवार को होटल ज्योति लोक में पलामू सांसद राम वीडी राम की अध्यक्षता में बैठक हुई.

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मेदिनीनगर. शनिवार को होटल ज्योति लोक में पलामू सांसद राम वीडी राम की अध्यक्षता में बैठक हुई. सभागार में प्रबुद्धजनों के साथ एक राष्ट्र-एक चुनाव के मुद्दे पर संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सभी ने एक स्वर से एक देश-एक चुनाव पर बल दिया. मौके पर सांसद श्री राम ने कहा कि एक देश -एक चुनाव का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है. इससे समय व संसाधनों की बचत होगी. उन्होंने कहा कि यह विचार वर्ष 1983 से ही अस्तित्व में है. निर्वाचन आयोग ने पहली बार इसे पेश किया था. 1967 तक भारत में एक साथ चुनाव आयोजित कराना एक सामान्य परिदृश्य रहा था. लोकसभा के प्रथम आम चुनाव और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव 1951-52 में एक साथ आयोजित कराये गये थे. यह अभ्यास वर्ष 1957, 1962 व 1967 में आयोजित अगले तीन आम चुनावों में भी जारी रहा. लेकिन वर्ष 1968 व 1969 में कुछ विधानसभाओं के समय-पूर्व विघटन के कारण यह चक्र बाधित हो गया. सांसद ने कहा कि बार-बार चुनाव आयोजित होने से शीर्ष नेताओं से लेकर स्थानीय प्रतिनिधियों तक पूरे देश का ध्यान भटक जाता है. जिससे विभिन्न स्तरों पर प्रशासन एक तरह से पंगु हो जाता है. चुनावी व्यस्तता भारत की विकास की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. चुनावों के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों स्तरों पर प्रमुख नीतिगत निर्णयों में विलंब का कारण बनती है. बार-बार चुनाव का आयोजन राजनीतिक भ्रष्टाचार में योगदान करते हैं. प्रत्येक चुनाव के लिए धन जुटाने की आवश्यकता होती है. एक साथ चुनाव कराने से राजनीतिक दलों के चुनाव खर्च में व्यापक कमी आ सकती है. जिससे बार-बार धन जुटाने की आवश्यकता समाप्त हो जायेगी. इससे आम लोगों और व्यापारिक समुदाय पर बार-बार चुनावी चंदा देने का दबाव भी कम हो जायेगा. 1951-52 में जब लोकसभा के प्रथम चुनाव में 53 राजनीतिक दलों व लगभग 1874 प्रत्याशियों ने भाग लिया था. चुनाव का व्यय 11 करोड़ था. वर्ष 2019 के आम चुनाव में 610 राजनीतिक दलों व लगभग नौ हजार उम्मीदवारों ने भागीदारी की. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के अनुसार लगभग 60 हजार करोड़ चुनावी खर्च पर राजनीतिक दलों के द्वारा अभी घोषणा किया जाना शेष है. एक साथ चुनाव होने से मतदाता सूची से नाम गायब होने के संबंध में नागरिकों की चिंताएं कम हो जायेगी. चुनावों के दौरान पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों की बड़े पैमाने पर बार-बार तैनाती में खर्च आता है. प्रमुख कानून प्रवर्तन कर्मियों का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों से विचलन होता है. निश्चित अवधि पर चुनाव कराने से प्रतिनिधियों के लिए व्यक्तिगत लाभ के लिए दल बदलना या गठबंधन बनाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जायेगा, जो मौजूदा दल-बदल विरोधी कानूनों को पूर्णता प्रदान करेगा. मौके पर संगोष्ठी में भाजपा प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, जिलाध्यक्ष अमित तिवारी, पूर्व अरुणा शंकर, श्याम नारायण दुबे, एनपीयू के वीसी डा दिनेश कुमार सिंह, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ पीएन महतो, चिकित्सा अधीक्षक अजय सिंह, प्रोफेसर केके मिश्रा, प्रोफेसर एसी मिश्रा, विपिन सिंह, डॉ विजय सिंह, आलोक दुबे, हरिवंश प्रभात, बलराम तिवारी, परशुराम ओझा, अमलेश्वर दुबे, प्रोफेसर विजय सिंह, शिवनाथ अग्रवाल, प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह, संतोष शुक्ला, डॉ अमित कुमार, डॉ आरके रंजन, प्रोफेसर विजय पांडेय, श्याम सिंह, अरविंद अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, नवीन सहाय, सुनील मिश्रा, आनंद सिंह सहित कई प्रबुद्ध लोग मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATYAPRAKASH PATHAK

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