झारखंड: राजकीय आदिवासी विकास महाकुंभ मेले में आदिवासी मुख्यमंत्री पर क्या बोले मंत्री मिथिलेश ठाकुर ?

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Feb 2023 7:09 AM

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झारखंड के पेयजल व स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों को झारखंड में आदिवासी मुख्यमंत्री बर्दाश्त नहीं हो रहा है, लेकिन जनता उनके मंसूबे को कभी कामयाब होने नहीं देगी. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का ऐतिहासिक विकास हुआ है.

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बेतला (पलामू) संतोष कुमार. रांची-मेदिनीनगर मार्ग पर बेतला मोड़ के दुबियाखाड़ में दो दिवसीय राजकीय आदिवासी विकास महाकुंभ मेले का आयोजन किया गया है. पेयजल व स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने संयुक्त रूप से मेले का उद्घाटन किया. मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों को झारखंड में आदिवासी मुख्यमंत्री बर्दाश्त नहीं हो रहा है. इधर, मेले के दौरान पलामू प्रमंडल के कोने-कोने से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे. पहली बार राजकीय मेला लगाये जाने के कारण पलामू जिला प्रशासन के द्वारा सभी विभागों का स्टॉल लगाने के साथ-साथ परिसंपत्तियों का भी वितरण किया गया. मेले के उद्घाटन के पूर्व मेला स्थल पर राजा मेदिनी राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मेला समिति के अध्यक्ष अर्जुन सिंह व संचालन अजय कुमार चेरों ने किया. कार्यक्रम के दौरान पोखराहा की आश्रिता देवी सहित अन्य लोगों को मुख्यमंत्री सृजन योजना के तहत 50-50 हजार रुपये का चेक (डेमो) दिया गया.

कुछ लोगों को आदिवासी मुख्यमंत्री बर्दाश्त नहीं

झारखंड के पेयजल व स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों को झारखंड में आदिवासी मुख्यमंत्री बर्दाश्त नहीं हो रहा है, लेकिन जनता उनके मंसूबे को कभी कामयाब होने नहीं देगी. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का ऐतिहासिक विकास हुआ है. यह सरकार लोगों के विकास की बात करती है जबकि अन्य लोगों की मंशा सिर्फ वोट बटोरने की होती है. दुबियाखाड़ में वर्षों से मेला लगाया जा रहा था, लेकिन किसी भी सरकार ने इसे सरकारी मेला बनाने का प्रयास नहीं किया, लेकिन राज्य की हेमंत सरकार ने इसे राजकीय मेला घोषित किया.

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आदिवासियों के हित में काम करे सरकार

विशिष्ट अतिथि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सह दुबियाखाड़ आदिवासी विकास मेला के सूत्रधार इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि 1991 में राजा मेदिनी राय को आदर्श मानकर व आदिवासी संस्कृति को विकसित करने के उद्देश्य से उन्होंने इस मेले की शुरुआत की थी, लेकिन उन्हें यह मलाल रहा कि वह अपने राजनीतिक जीवन में इसे राष्ट्रीय अथवा राजकीय स्तर पर पहचान नहीं दिला सके. उनकी हसरत रही थी कि इस मेले का रूप सोनपुर मेला की तरह हो. अब उन्हें इस बात की खुशी है कि मंत्री मिथिलेश ठाकुर व वर्तमान सरकार के प्रयास से यह मेला राजकीय घोषित हो गया है, लेकिन सिर्फ मेला लगाने से आदिवासियों का हित नहीं होने वाला है. आदिवासियों की दुर्दशा देखकर उन्हें आज भी बेहद दुख होता है. जब तक सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए काम नहीं करती है तब तक यह मेला का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा. विधायक रामचंद्र सिंह मेला में शामिल नहीं हो सके. पलामू के उपायुक्त अंजनैयुलू दौड़े ने कहा कि सरकार के निर्देश पर पलामू के आदिवासियों के विकास के लिए उनके द्वारा कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है. छतरपुर, नौडीहा ,मनातू सहित सुदूरवर्ती इलाके में भी आदिवासियों के विकास के लिए काम किया जा रहा है. पलामू एसपी चंदन सिन्हा ने कहा कि राजा मेदिनी राय की इस पवित्र भूमि पर आदिवासियों का यह महाकुंभ निश्चित रूप से आने वाले समय में सोनपुर मेला का रूप ले लेगा. अध्यक्षीय भाषण में अर्जुन सिंह ने पलामू समाहरणालय में राजा मेदिनी राय की प्रतिमा लगाने, डाल्टेनगंज रेलवे स्टेशन को मेदनी राय स्टेशन करने, सभी प्रखंड में आदिवासी हॉस्टल खोलने की मांग की.

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