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धार्मिक अनुष्ठान हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं : केएन त्रिपाठी

Updated at : 20 May 2025 9:47 PM (IST)
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धार्मिक अनुष्ठान हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं : केएन त्रिपाठी

श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के प्रवचन मंच का उद्घाटन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने फीता काट कर किया.

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सतबरवा. सदर प्रखंड क्षेत्र के लहलहे गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के प्रवचन मंच का उद्घाटन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने फीता काट कर किया. श्री त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान होने से सुख, समृद्धि व शांति आती है. जिससे मनुष्य समेत अन्य जीवों को भी जीवन जीने में सहूलियत होती है. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों में हम सभी धर्मप्रेमियों को तन, मन, धन से सहयोग के लिए तत्पर रहना चाहिए, ताकि अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपूर्ण हो सके. उन्होंने कहा कि धर्म हमें सच्चे मार्ग पर चलने तथा जीवन जीने की कला को सिखलाती है. श्री त्रिपाठी ने कहा कि मानव जीवन जन कल्याण के लिए समर्पित करना ही जीवन का मूल सार है. जीवन में गृहस्थ आश्रम की सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए समाज के कार्य करना भी मानवीय सरोकार है. मौके पर नवीन तिवारी, दीपक दुबे, संजय त्रिपाठी, महिमा नंद तिवारी, धीरेंद्र तिवारी, सुआ मुखिया उपाध्याय सिंह, मुखिया रविंद्र सिंह, कांग्रेस सदर प्रखंड अध्यक्ष रवींद्र तिवारी, अनूप तिवारी, विनोद तिवारी, सुरेंद्र शुक्ला, अमित तिवारी, मृत्युंजय तिवारी छोटू, ब्रजेश तिवारी, आशीष तिवारी, कामाख्या सिंह, सुधीर सिंह, जेपी सिंह, राणा सिंह व बीरेंद्र सिंह सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे.

मनुष्य जीवन के थकान के बाद ईश्वर के शरण में आता है : मारुति किंकर महाराज

सदर प्रखंड क्षेत्र के लहलहे गांव में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय भागवत महापुराण कथा के प्रथम दिन प्रवचन करने आये मारुति किंकर जी महाराज ने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में चलते-चलते थक जाता है, तो उसे भगवान की याद आती है तथा वह प्रभु की शरण में चला आता है. उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण भगवान के शरण में जाने का उचित माध्यम है. उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का श्रवण कर अपने जीवन में उतारना स्वर्ग के अमृत लोक से भी बड़ा है. उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान तथा श्रवण से ही मनुष्य बुरे कर्मों से बच सकता है, इसलिए हमेशा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेना चाहिए, ताकि महात्माओं के द्वारा दिये उपदेशों को अपने जीवन में उतार सकें. इस दौरान उन्होंने भागवत महापुराण के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATYAPRAKASH PATHAK

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