दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल के लिए दो दिन भटकना पड़ा, सीएस के हस्तक्षेप से हुआ

गुमला में प्रक्रियागत लापरवाही उजागर, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं हुई जांच
गुमला में प्रक्रियागत लापरवाही उजागर, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं हुई जांच गुमला. जिले में एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए घंटों तक भटकना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था और संवेदनशील मामलों में प्रक्रियागत लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. मामला कुरूमगढ़ थाना क्षेत्र का है, जहां 15 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद भी उसे समय पर चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल सकी. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे पुलिस पीड़िता को लेकर सदर अस्पताल पहुंची. ड्यूटी पर मौजूद महिला चिकित्सक ने ऑपरेशन थियेटर में व्यस्त होने का हवाला देते हुए करीब पांच घंटे तक इंतजार कराया. देर शाम तक मेडिकल जांच नहीं हो सकी और ड्यूटी समाप्त होने की बात कह कर चिकित्सक चली गयीं. इसके बाद पीड़िता को रात में वापस थाना क्षेत्र ले जाया गया. शनिवार की सुबह पीड़िता को दोबारा अस्पताल लाया गया, लेकिन दोपहर करीब 2:30 बजे तक भी मेडिकल नहीं हो पाया. दूसरी ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर ने यह कहते हुए जांच से इनकार कर दिया कि पहले ड्यूटी पर रही डॉक्टर को ही यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी. आखिरकार पुलिस द्वारा सिविल सर्जन से हस्तक्षेप की मांग करने पर शनिवार दोपहर पीड़िता का मेडिकल कराया जा सका. इस देरी के कारण उसी दिन न्यायालय में धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान दर्ज नहीं हो पाया. अब उसे दोबारा करीब 40 किलोमीटर दूर गुमला लाया जायेगा. इस मामले पर अरुण कुमार ने कहा कि इस तरह की लापरवाही कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है. पोक्सो एक्ट के तहत नाबालिग पीड़िताओं के मामलों में त्वरित मेडिकल जांच और संवेदनशील व्यवहार अनिवार्य है. वहीं, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान जल्द से जल्द मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया मजबूत हो सके.
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