बीएड कालेज में भारतीय शिक्षा तकनीकी व नवाचार विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

Updated at : 07 Mar 2025 7:06 PM (IST)
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बीएड कालेज में भारतीय शिक्षा तकनीकी व नवाचार विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

शाहपुर-गढ़वा मार्ग के किन्नी स्थित कुंवर पिरथी नाथ सिंह बीएड कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया.

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फोटो:07डालपीएच 18 प्रतिनिधि, मेदिनीनगर शाहपुर-गढ़वा मार्ग के किन्नी स्थित कुंवर पिरथी नाथ सिंह बीएड कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इसमें भारतीय शिक्षा में तकनीकी व नवाचार के अवसर एवं चुनौतियां विषयक पर चर्चा की गयी. इसका उदघाटन नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ रविशंकर, पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी, कोलकाता के प्रोफेसर अभिजीत कुमार पाल, रांची आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के डीन रिसर्च ऑफ एजुकेशन डा शांतनु विश्वास, प्रयागराज यूनिवर्सिटी के डा विमला व्यास, कालेज के चेयरमैन श्यामकिशाेर सिंह ने संयुक्त रूप से किया. अतिथियों को मेमेंटो व शॉल भेंट कर स्वागत किया गया. मौके पर एनपीयू के डॉ रविशंकर ने शिक्षण व्यवस्था के बदलते स्वरूप के लिए आइसीटी की उपयोगिता को रेखांकित करने की जरूरत बताया. उन्होंने शिक्षक एवं शिक्षार्थियों को नवीनतम तकनीक के साथ अपडेट रहने की बात कही. पश्चिम बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर श्री पाल ने आइसीटी को सूचनाओं के भंडारण एवं आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बताया. कहा कि रेडियो, कंप्यूटर से लेकर स्मार्टफोन व तक के सफर में जनसुलभ होती है. उन्होंने आइसीटी को दूरस्थ शिक्षा का महत्वपूर्ण उपक्रम बताया. आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के डीन रिसर्च ऑफ एजुकेशन डा शांतनु विश्वास ने चैलेंजेस ऑफ आइसीटी इन एजुकेशन विषय को आर्थिक व तकनीकी संसाधनों की विशेष भूमिका माना है. उन्होंने कहा कि इसकी उपलब्धता गांव स्तर तक होनी चाहिये. सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं पर विस्तार से बताया. उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में उपयोगी एप्लीकेशन व सॉफ्टवेयर की जानकारी दी. मानव देवी डेडिकेटेड अकेडमी के इंजीनियर विनय कुमार मेहता ने सूचना तकनीक बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला. प्रयागराज यूनिवर्सिटी के डा विमला व्यास ने अकादमिक क्षेत्र में उपयोगी एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर आदि की जानकारी दी. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस नीति के तहत अनुसंधान एवं शिक्षण की प्राथमिकता के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों के तीन प्रकार निर्धारित किया जाना प्रस्तावित है. धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के अध्यक्ष श्याम किशोर सिंह ने दिया. मंच संचालन सलोनी व विवेक रंजन सिंह ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के सचिव अमिता कुमारी, प्राचार्य रविंद्र प्रताप, सेमिनार कोऑर्डिनेटर डा चंदन कुमार गुप्ता, आइक्यूएसी कॉर्डिनेटर नंदलाल विश्वकर्मा, व्याख्याता अजय कुमार, महानंद महतो, संतोष चंद्रवंशी, अजयधर द्विवेदी, विक्रम देव, संजीव कुमार, इंद्र बहादुर सिंह, आशुतोष तिवारी, देवेंद्र प्रकाश, डा प्रेमजीत सिंह सहित सभी सदस्यों का योगदान महत्वपूर्ण रहा.

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