ePaper

पलामू टाइगर रिजर्व से 35 गांव के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू

Updated at : 29 Jul 2025 6:35 PM (IST)
विज्ञापन
International Tiger Day Palamu Tiger Reserve

पलामू टाइगर रिजर्व में अभी 6 बाघों की गतिविधियों का वन विभाग कर रहा दावा.

International Tiger Day: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व से 35 गांवों के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. पीटीआर के निदेशक ने यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि जयगीर गांव के 160 लोगों को आरक्षित क्षेत्र से बाहर पुनर्वासित किया जा चुका है. तीन साल में सभी लोगों के पुनर्वास का लक्ष्य रखा गया है.

विज्ञापन

International Tiger Day: झारखंड वन विभाग ने बाघों के लिए एक बेहतर आवास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पलामू बाघ अभ्यारण्य (पीटीआर) के 35 गांवों के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि वन सीमा के अंतर्गत जयगीर गांव में रहने वाले लगभग 160 लोगों को पहले ही आरक्षित क्षेत्र से बाहर पुनर्वासित किया जा चुका है.

जयगीर गांव के लोग पोलपोल में किये गये स्थानांतरित

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर पीटीआर (Palamu Tiger Reserve) के निदेशक एसआर नतेश ने बताया कि जयगीर गांव के लोगों को पलामू जिले में आरक्षित क्षेत्र के बाहर स्थित पोलपोल में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि कुजरुम और लाटू इन 2 गांवों के ग्रामीणों का भी पुनर्वास करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.’

10 हजार की जनसंख्या वाले 35 गांव आरक्षित वन क्षेत्र में

यहां एक अन्य अधिकारी ने बताया कि लगभग 10 हजार की जनसंख्या वाले करीब 35 गांव आरक्षित वन के मुख्य क्षेत्र में हैं, जहां अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष होता रहता है. पीटीआर के 1,129.93 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 414.08 वर्ग किलोमीटर बाघों के निवास के लिए महत्वपूर्ण यानी मुख्य क्षेत्र है और शेष 715.85 वर्ग किलोमीटर को ‘बफर जोन’ के रूप में चिह्नित किया गया है.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

226.32 वर्ग किमी में फैला है बेतला राष्ट्रीय उद्यान

कुल क्षेत्रफल में से 226.32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बेतला राष्ट्रीय उद्यान के रूप में नामित है, जबकि बफर जोन में 53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुला है. पीटीआर के उप निदेशक प्रजेश जेना ने बताया कि सभी 35 गांवों के ग्रामीणों का चरणबद्ध तरीके से आरक्षित क्षेत्र से बाहर पुनर्वास किया जायेगा. पहले चरण में 10 गांवों के ग्रामीणों का पुनर्वास होगा, जिनमें से 3 दक्षिणी प्रभाग में और 7 पीटीआर के उत्तरी प्रभाग में हैं.

International Tiger Day: लाटू और गुजरुम के परिवारों का हुआ पुनर्वास

उन्होंने बताया कि लाटू में लगभग 80 घर और कुजरुम में 50 से अधिक घर हैं. कुजरुम से 10 परिवारों का पहले ही पोलपोल में पुनर्वास किया जा चुका है. जेना ने बताया कि 3 गांवों के ग्रामीणों का पुनर्वास किये जाने के बाद, हम मंडल बांध क्षेत्र से 7 और गांवों का लातेहार जिले के सरजू प्रखंड के लाई-पैला पत्थल गांव में पुनर्वास करवायेंगे. इसी तरह, दूसरे चरण में 10 गांवों के ग्रामीणों का पुनर्वास किया जायेगा.

3 साल में 35 गांवों के पुनर्वास का है लक्ष्य

उन्होंने कहा कि पीटीआर अधिकारियों ने अगले 3 वर्षों में सभी 35 गांवों का पुनर्वास किये जाने का लक्ष्य रखा है. जेना ने कहा कि पीटीआर पुनर्वास नीति के अनुसार, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति को एक इकाई या परिवार माना गया है और वह 15 लाख रुपए नकद या 2 हेक्टेयर भूमि का हकदार होगा. कैमरे की तस्वीरों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारी अब 6 बाघों की गतिविधियां यहां दर्ज किये जाने का दावा कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें

बचपन में घूम-घूमकर बेचा ब्रेड, बने YouTube एन्फ्लूएंसर, योजनाओं के प्रचार में ‘सरकार’ मांग रही मदद

देवघर में बस-ट्रक की टक्कर में 6 की मौत, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के 2 दर्जन से अधिक घायल

Palamu Tiger Reserve: बाघ देखना है, तो चले आईए पलामू टाइगर रिजर्व

Cyber Crime: सीबीआई अधिकारी बनकर रेलवे कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट कर 3.9 लाख रुपए की ठगी

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola