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बेतला नेशनल पार्क में मर रहे पक्षी, दो दुर्लभ पक्षी की भी मौत, अज्ञात बीमारी की आशंका

Updated at : 04 Feb 2020 7:24 AM (IST)
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बेतला नेशनल पार्क में मर रहे पक्षी, दो दुर्लभ पक्षी की भी मौत, अज्ञात बीमारी की आशंका

संतोष तीन दिन में दो हरियाल पक्षी मृत मिले बेतला : बेतला नेशनल पार्क में अज्ञात बीमारी के कारण दुर्लभ पक्षियों की लगातार मौत हो रही है. वन विभाग मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम कर मौत के कारणों का पता लगाने में जुटा है. पिछले तीन दिनों में दो हरियाल पक्षी मृत पाये गये. हालांकि उनकी […]

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संतोष
तीन दिन में दो हरियाल पक्षी मृत मिले
बेतला : बेतला नेशनल पार्क में अज्ञात बीमारी के कारण दुर्लभ पक्षियों की लगातार मौत हो रही है. वन विभाग मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम कर मौत के कारणों का पता लगाने में जुटा है. पिछले तीन दिनों में दो हरियाल पक्षी मृत पाये गये. हालांकि उनकी मौत कैसे हुई है, इसका खुलासा नहीं हो सका है. इससे पूर्व मैना, चील, तीतर बटेर, बगुला सहित अन्य पक्षियों की भी मौत हो चुकी है. वन विभाग के बड़े पदाधिकारियों ने मामले की जांच कराने का आदेश दिया है.
आशंका जतायी जा रही है कि किसी खतरनाक बीमारी की चपेट में बेतला नेशनल पार्क न आ जाये. ज्ञात हो कि बेतला नेशनल पार्क में न सिर्फ दुर्लभ पक्षी, बल्कि सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी रहते है. आंकड़ों के मुताबिक, यहां 174 प्रकार के पक्षियों की प्रजाति पायी जाती है.
इनमें हरियाल के अलावा लंबी पूछवाली बुलबुल, काले रंगवाले भुजंग, रेक्टल डेंगू, काला तीतर, बटेर,काला बगुला, किंगफिशर, पिग्मी किंगफिशर के अलावा पनडुब्बी पंडूक पीलक, पपीहा, मोर, चील, उल्लू,कबूतर मोर गोरैया आदि शामिल हैं. इतना ही नहीं, कई प्रवासी पक्षी भी यहां आते हैं, जो पार्क क्षेत्र के प्राकृतिक जलाशयों व कमलदह झील के आसपास विचरण करते दिखायी पड़ते हैं.
कीटनाशक दवा भी हो सकते हैं मौत का कारण : जानकार बताते हैं कि किसानों द्वारा खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए कीटनाशक दवा का इस्तेमाल किया जाता है. जंगल से सटे गांव के खेतों में जब पार्क के पक्षी दाना चुगने जाते हैं, तो कीटनाशक दवा भी खा लेते हैं. इस कारण भी पक्षियों की मौत होने की आशंका जतायी जा रही है. मृत चूहा खाने से बड़ी संख्या में कौआ भी मर रहे हैं.
गुलेल से मारे जाते हैं पक्षी : बेतला नेशनल पार्क से सटे हुए गांव में कई लोग पक्षियों को पकड़ कर बेच भी देते हैं. वहीं कुछ लोग गुलेल से उनका शिकार भी करते हैं. चारे की खोज में जैसे ही पक्षी गांव की ओर रुख करते हैं, वहां पहले से घात लगाये शिकारियों द्वारा उन्हें मार दिया जाता है.
पक्षियों की मौत चिंताजनक : विशेषज्ञ
वन्य प्राणी विशेषज्ञ डाॅ डीएस श्रीवास्तव ने बताया कि दुर्लभ पक्षियों के अलावा अन्य पक्षियों की मौत चिंता का विषय है. वन विभाग को इस पर गंभीरता दिखानी चाहिए. मौत के कारणों की पड़ताल करते हुए पक्षियों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए.
प्रथमदृष्टया प्राकृतिक मौत है कारण : उपनिदेशक
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक कुमार आशीष ने बताया कि प्रथमदृष्टया पक्षियों की मौत प्राकृतिक है. हालांकि विभाग नजर रख रहा है. किसी भी पशु या पक्षी की मौत के कारणों की पड़ताल की जाती है.
बर्ड फ्लू की आशंका नहीं पूरा रिजर्व अलर्ट पर
बर्ड फ्लू या किसी प्रकार की बीमारी की कोई आशंका नहीं है. आम तौर पर हरियाल का शिकार का प्रयास होता रहता है. लेकिन, यह शिकार का मामला भी नहीं है. इसके बावजूद पूरे रिजर्व को अलर्ट पर रखा गया है. चिकित्सकों की मदद भी ली जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार है.
-वाइके दास, निदेशक, पीटीआर, पलामू
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