चार लोगों ने बदली तस्वीर, वीरान होते जंगलों में लौट रही हरियाली

Updated at : 09 Jul 2019 12:58 AM (IST)
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चार लोगों ने बदली तस्वीर, वीरान होते जंगलों में लौट रही हरियाली

चैनपुर (पलामू) : चुनौती अवसर में भी बदल सकती है, बशर्ते लोगों को सकारात्मक सोच के साथ काम करना होगा. लोग कहते हैं कि गांव वाले साथ नहीं देंगे, तो दो- चार आदमी मिल कर क्या कर लेंगे. यदि ईमानदारी के साथ कुछ कर गुजरने की तमन्ना दिल में हो, तो समाज में परिवर्तन लाने […]

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चैनपुर (पलामू) : चुनौती अवसर में भी बदल सकती है, बशर्ते लोगों को सकारात्मक सोच के साथ काम करना होगा. लोग कहते हैं कि गांव वाले साथ नहीं देंगे, तो दो- चार आदमी मिल कर क्या कर लेंगे. यदि ईमानदारी के साथ कुछ कर गुजरने की तमन्ना दिल में हो, तो समाज में परिवर्तन लाने के लिए चार आदमी का प्रयास भी कम नहीं होता है.

ऐसे ही चार व्यक्तियों के प्रयास ने वीरान होते जंगलों में हरियाली ला दी है. हरियाली की यह कहानी पलामू स्थित चैनपुर प्रखंड के बहेरा खुर्द गांव की है. चैनपुर ब्लॉक प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर से सटा हुआ है. लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर चैनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित है.

चैनपुर प्रखंड मुख्यालय से बहेरा की दूरी करीब 20 किलोमीटर है. इस गांव के रहने वाले चंद्रदेव चौधरी, फागू चौधरी, जनार्दन चौधरी और शिव चौधरी के प्रयास की चर्चा आज गांवों में हो रही है. यह बात दो वर्ष पहले की है. गांव में चर्चा हो रही थी कि शहर जैसी स्थिति अब गांव में हो रही है. गर्मी के दिनों में चापानल और कुआं सुखने लगा है.
निरंतर जल स्तर नीचे जा रहा है. ऐसा आखिर क्यों हो रहा है. चौपाल से ही चर्चा निकली. कहा गया कि वन उजड़ रहे हैं. पानी कम हो रहा है. ऐसे में स्वाभाविक है कि जल संकट शुरू होगा. यही से चारों ने यह सोचा कि वन की रक्षा करेंगे. बहेरा खुर्द के पास वन विभाग का लगभग एक हजार एकड़ में वन क्षेत्र फैला है. बहेरा खुर्द, लाली, डोकी व छतवा इलाके में वन है.
वनों की रक्षा के लिए लोगों को समझाना शुरू किया : चारों ने मिल कर पहले कुछ करने के बारे में सोचा. वन क्षेत्र बड़ा है. विभाग प्रयास कर ही रहा है, लेकिन लोग जागरूक नहीं है. वन कट रहे हैं. समझाने पर लोग मानेंगे या नहीं. पहले दौर में इन लोगों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब लोग नहीं माने, तो इन लोगों ने वन के रक्षक के रूप में आगे आये. लोगों ने जंगल काटने वाले के प्रति सख्ती दिखायी. जो लोग जंगल में पेड़ काटने के लिए पहुंचते थे, उनकी कुल्हाड़ी लूट ली जाती थी. उन्हें कहा जाता था कि आगे आने पर विभाग को सूचना दे देंगे.
वन की रक्षा में जुटे लोगों को इस बात का मलाल है कि विभाग ने अपेक्षित साथ नहीं दिया. वह लोग निजी स्तर पर प्रयास कर रहे थे. कुछ लोग तो विरोधी हो गये. लेकिन जो समझदार थे, वह साथ आये. इसके बाद पूरा नजारा ही बदल गया. चंद्रदेव चौधरी, फागू चौधरी, जनार्दन चौधरी व शिव चौधरी ने कहा कि अब ग्रामीण भी साथ दे रहे हैं. वह समझ चुके हैं कि आने वाले कल के लिए जंगल को बचाना जरूरी है. जंगल से ही जीवन में मंगल रहेगा.
चंद्रदेव ने कहा कि दरअसल जल संकट से ही उनलोगों को वन संरक्षण की प्रेरणा मिली है. उनलोगों को यह महसूस हो गया कि यदि आज जागृत नहीं होंगे, तो आनेवाला कल काफी भयावह होगा. चारों लोगों की टीम सिर्फ अपने आसपास के जंगल की रक्षा कर ही संतुष्ट नहीं है, बल्कि लोगों को वन बचाने के लिए प्रेरित भी कर रही है. दिन में तीन बार वह लोग वन की अोर जाकर देखते हैं कि वन को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा है. गश्ती में ग्रामीण भी साथ होते हैं. उन लोगों का कहना है कि प्रयास का सकारात्मक नतीजा है कि वीरान हो रहे जंगल में हरियाली लौट रही है.
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