10 साल बाद मिला न्याय, 2398 के टिकट के बदले रेलवे देगा 12000 से ज्यादा, जानें कैसे

सांकेतिक फोटो
Train Ticket Refund: पटना उपभोक्ता आयोग ने रेलवे के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. आयोग ने कहा कि अगर किसी यात्री का वेटिंग टिकट खो जाता है, तो रेलवे केवल इस आधार पर रिफंड देने से मना नहीं कर सकता. रेलवे को अब टिकट के पैसे ब्याज समेत लौटाने होंगे और हर्जाना भी देना होगा.
Train Ticket Refund: पटना के जिला उपभोक्ता आयोग (District Consumer Commission) ने रेलवे से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. आयोग ने कहा कि अगर किसी यात्री ने रेलवे काउंटर से सही टिकट खरीदा है और टिकट पक्का नहीं होने की वजह से यात्रा नहीं कर पाया, तो सिर्फ टिकट खो जाने के कारण पैसा लौटाने से मना करना सही नहीं है. आयोग ने इसे रेलवे की सेवा में कमी माना है.
किस मामले में सुनाया गया फैसला
यह फैसला पटना डिस्ट्रिक्ट कन्जूमर रेड्रेस्सल कमीशन ने उपभोक्ता वाद संख्या 125/2014 में सुनाया. इस मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार की बेंच ने की.
मामला पटना के कंकड़बाग इलाके के रहने वाले शंभू नाथ से जुड़ा है. उन्होंने दिल्ली से पटना आने के लिए रेलवे काउंटर से टिकट खरीदा था. यह टिकट वेटिंग लिस्ट में थी और बाद में कन्फर्म नहीं हो सका. इस वजह से उन्होंने उस टिकट पर यात्रा नहीं की.
अधिकारियों ने क्या कह कर मना कर दिया था
इस दौरान उनका मूल कागजी टिकट खो गया. जब उन्होंने रेलवे से किराया वापस करने की मांग की तो अधिकारियों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि टिकट मौजूद नहीं है, इसलिए पैसा वापस नहीं किया जा सकता.
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने टिकट खोने की जानकारी रेलवे को दी थी और इस बारे में जानकारी भी मांगी थी, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई.
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इतने दिन के अंदर देना होगा पैसा
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि यात्री ने सही तरीके से टिकट खरीदा था और उस पर यात्रा भी नहीं की थी. आयोग ने कहा कि रेलवे के पास सभी टिकटों का रिकॉर्ड होता है, इसलिए केवल टिकट खो जाने के कारण पैसा वापस करने से इनकार करना उचित नहीं है.
आयोग ने आदेश देते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को टिकट की राशि 2398 रुपये वापस की जाए. इसके साथ ही 28 मार्च 2014 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाए. आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए 5000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में भी 5000 रुपये देने का आदेश दिया है. आयोग ने रेलवे को 120 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करने का निर्देश दिया है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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