पर्यावरण के प्रति वफादार रहने की प्रेरणा देता है धर्म

Updated at : 19 Nov 2018 1:44 AM (IST)
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पर्यावरण के प्रति वफादार रहने की प्रेरणा देता है धर्म

नावाबाजार : छतरपुर प्रखंड के डाली के कौशल नगर में 1008 शेषनारायणाचार्य के नेतृत्व में आयोजित लक्ष्मीनारायण महायज्ञ रविवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हो गया. कलश यात्रा में पर्यावरण संरक्षण अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सह वनराखी मूवमेंट व पर्यावरण धर्म के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल मौजूद थे. उन्होंने श्रद्धालुओं को कलश देकर यात्रा […]

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नावाबाजार : छतरपुर प्रखंड के डाली के कौशल नगर में 1008 शेषनारायणाचार्य के नेतृत्व में आयोजित लक्ष्मीनारायण महायज्ञ रविवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हो गया. कलश यात्रा में पर्यावरण संरक्षण अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सह वनराखी मूवमेंट व पर्यावरण धर्म के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल मौजूद थे. उन्होंने श्रद्धालुओं को कलश देकर यात्रा की शुरुआत करायी. अध्यक्ष श्री जायसवाल ने कहा कि यज्ञ वातावरण की शुद्धता व समाज में असुरी शक्तियों का नाश करने के लिए किया जाता है.
साथ ही हमारे जीवन के लिए जो जरूरी है, उसके कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है. धर्म से मनुष्य को अपने कर्तव्य का भी ज्ञान होता है. मनुष्य के लिए प्रकृति से बड़ा मित्र कोई नहीं है. मनुष्य इस मित्रता धर्म का निर्वाह नहीं कर पा रहा है. जो मित्र हमारे प्रति वफादार हो, उनके प्रति वफादारी दिखाना भी धर्म है. इसलिए हम सभी को इस बात का संकल्प लेना होगा कि प्रकृति को अपना मित्र मानते हुए जिस तरह वह मनुष्यों के साथ वफादारी दिखा रहा है.
उसी तरह मनुष्य भी वन व पर्यावरण के प्रति वफादार बने रहेंगे और उसके बेहतरी के लिए काम करेंगे. धर्म लोगों को सही रास्ता दिखाता है. जब लोग सही रास्ते पर चलेंगे तो एक बेहतर वातावरण बनेगा. आज जल व वन संरक्षण की बात चल रही है.इसकी प्रेरणा यज्ञ व धर्म से भी मिलती है. कलश यात्रा इसी का प्रतीक है कि हम जल का संरक्षण करें न की उनका दोहन करे. आचार्य शेषनारायणाचार्य ने कहा कि यज्ञ से मानव जीवन का कल्याण संभव है. जब-जब मानव जीवन पर संकट आया है, तब यज्ञ किया गया है. इसके बाद संकट समाप्त हुआ है.
मुखिया अमित जायसवाल ने कहा कि धार्मिक कार्यों से लोगों में भाईचारगी का वातावरण बनता है. यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है. श्रद्धालुओं ने सतबहिनी नदी में आचार्य के वैदिक मंत्रोच्चार के बाद कलश में जलभरा.
कलश लेकर यज्ञ स्थल पर पहुंचे वैदिक मंत्रोच्चार के बाद कलश को स्थापित किया गया. मौके पर अध्यक्ष महजर यादव ,कैलाश यादव ,सचिव श्रवण जायसवाल, रविंद्र जयसवाल, रघुनाथ जयसवाल, मनोज विश्वकर्मा, सुजीत जायसवाल, रामजन्म जयसवाल, रामजीत जयसवाल ,लल्लू जायसवाल, लाल बिहारी यादव ,बालेश्वर यादव ,सुखदेव राम ,सत्येंद्र राम ,पूर्व मुखिया अफजाल अंसारी,बसीर अंसारी, जुबेर आलम, गुलाम गौस, मोती यादव सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे.
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