बिना ट्रांजिट परमिट के कोयला ढुलाई को वन विभाग ने करवाया बंद, हाइवा मालिकों में दिखी मायूसी

Updated at : 10 Dec 2020 2:10 PM (IST)
विज्ञापन
बिना ट्रांजिट परमिट के कोयला ढुलाई को वन विभाग ने करवाया बंद, हाइवा मालिकों में दिखी मायूसी

बिना ट्रांजिट परमिट के कोयला ढुलाई को वन विभाग ने करवाया बंद

विज्ञापन

पाकुड़ : जिले में संचालित एक मात्र कोयला खदान पचुवाड़ा नोर्थ कॉल ब्लॉक से कोयले की ढुलाई बुधवार रात से बंद हो गई है. पाकुड़ वन विभाग ने नोटिस जारी कर कोयला खदान से कोयले की ढुलाई को बंद करने का निर्देश दिया है. वन विभाग द्वारा कोल कंपनी को दिये गये नोटिस में जिक्र किया गया है कि झारखंड वनोपज (अभिवहन का विनियमन) नियमावली, 2020 के तहत कोयले की ढुलाई के लिए ट्रांजिट परमिट लेना अनिवार्य है.

बिना ट्रांजिट परमिट के कोयला का परिवहन अवैध माना जाएगा. ऐसे में बकाये राशि का भुगतान करते हुए ट्रांजिट परमिट के लिए अग्रिम भुगतान कर कोयले की ढुलाई करें. ऐसा नहीं करने पर कोयला ढुलाई करने वाले वाहनों व कोल कंपनी के खिलाफ नियमसंगत तरीके से कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्या कहतें हैं रेंजर

वन क्षेत्र पदाधिकारी ने पचुवाड़ा नोर्थ कोल ब्लॉक का संचालन कर रही कोल कंपनी डब्ल्यूबीपीडीसीएल को इस मामलें को लेकर नोटिस जारी किया है. जिसके बाद से कोयले की ढुलाई पूर्णतः बंद हो गई है. वन क्षेत्र पदाधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि वन विभाग के नियमों के तहत कोयला को वनोपज माना गया है. ऐसे में इसके परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट लेना जरुरी है. यदि बिना ट्रांजिट परमिट के कोयले का परिवहन किया जाएगा. तो उसे अवैध मानते हुए अग्रतर कार्रवाई की जाएगी. इस संबँध में डब्ल्यूबीपीडीसीएल को लिखित जानकारी दे दी गई है.

क्या कहते हैं डब्ल्यूबीपीडीसीएल के डायरेक्टर

डब्ल्यूबीपीडीसीएल के डायरेक्टर अमलेश कुमार ने बताया कि राज्य के कई कोयला खदानों में नॉन फॉरेस्ट एरिया से कोयले की ढुलाई की जाती है लेकिन वे कोयला खदान संचालक ट्रांजिट परमिट (टीपी) नहीं ले रहे हैं. जबकि डब्ल्यूबीपीडीसीएल भी गैर वन भूमि से कोयले का खनन और परिवहन कर रही है. ऐसे में सिर्फ हमें दवाब देना सही नहीं है. यह नियम सब पर सामान रुप से व्यवहार करना चाहिए. सीसीएल, ईसीएल, बीसीएल ने अभी तक पैसा जमा नहीं किया है. लेकिन हमने पैसा भी जमा किया है. हमने वन विभाग को पत्र लिख कर यह भी कहा है कि जब अन्य कोल कंपनी ट्रांजिट परमिट नहीं ले रही है तो फिर ऐसे में सिर्फ हम ही पैसा जमा क्यों करें.

क्या कहते हैं वन विभाग के प्रधान सचिव

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कोयला को वनोपज माना है. इसे लेकर राज्य में झारखंड वनोपज (अभिवहन का विनियमन) नियमावली, 2020 कानून भी पारित किया गया है. ऐसे में सभी कोयला कंपनी को कोयले के परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट लेना आवश्यक है, चाहे कोयले का उत्खनन वन भूमि से किया जा रहा हो या गैर वन भूमि से कोयले का परिवहन किया जा रहा हो. दोनों ही स्थितियों में कोयले के परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट लेना अनिवार्य है. ऐसे में सभी कंपनियों को इसकी सूचना दे दी गई है.

कोयले की ढुलाई बंद होने से मायूस बैठे हाइवा मालिक

पचुवाड़ा नोर्थ कोल ब्लॉक से कोयले की ढुलाई में लगभग 200-300 हाइवा शामिल है. ऐसे में कोयले की ढुलाई बंद होने से इन हाइवा मालिकों व ट्रांसपोर्टरों में दुविधा की स्थिती बन गई है. साथ ही इससे अप्रत्यक्ष रुप से जुड़े हजारों लोगों को भी रोजगार का नुकसान उठाना पड़ रहा है. कोयले की ढुलाई से ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कोयले की ढुलाई बंद होने से रोजगार प्रभावित हो रहा है. यह बंद सभी कोयला खदानों में सुनने को नहीं मिल रहा है. ऐसे में सिर्फ पाकुड़ में कोयले की ढुलाई बंद होने की जानकारी मिल रही है. जिससे दुविधा काफी बढ़ गई है.

posted by : sameer oraon

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola