प्लास्टिक के उपयोग पर लगे प्रतिबंध का नहीं दिख रहा असर
Published by : RAGHAV MISHRA Updated At : 22 Oct 2025 7:01 PM
पाकुड़. शहर समेत ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सरकार की ओर से जारी प्लास्टिक के उपयोग पर लगे प्रतिबंध का असर नहीं दिख रहा है.
जिले में प्रतिदिन प्लास्टिक से निर्मित सामग्री की हो रही खरीद बिक्री
प्रतिनिधि, पाकुड़. शहर समेत ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सरकार की ओर से जारी प्लास्टिक के उपयोग पर लगे प्रतिबंध का असर नहीं दिख रहा है. प्रतिदिन प्लास्टिक व प्लास्टिक से निर्मित सामग्री की खरीद बिक्री का उपयोग धड़ले से हो रहा है. यह प्रतिदिन कचरे में परिवर्तित होकर शहर की सूरत और सेहत खराब कर रही है, जब मामला सामने आते हैं तो नगर परिषद छोटी-मोटी करवाई कर शांत हो जाती है. ग्रामीण इलाकों में तो किसी प्रकार की कोई होती ही नही हैं. कार्रवाई नहीं होने के कारण प्लास्टिक का उपयोग शहर सहित ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ता जा रहा है. सब्जी मंडी, फल, किराना, मिठाई, दवाई दुकान, मुर्गा, मटन व मछली की दुकानों में इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है. खरीदारी के लिए दुकानों पर जाने वाले लोग भी इसे स्वीकार भी कर रहे हैं. इसका उपयोग करने के बाद इस पॉलीथिन को चौक-चौराहों, कूड़ेदान, नालों में फेंक दिया जाता है. यह ना सिर्फ पर्यावरण के लिए प्रतिकूल है, बल्कि आवारा पशु भी कूड़ेदानों से खाने के चक्कर में पॉलीथिन को निगल जा रहे हैं. यह पशुओं के सेहत पर भी खतरनाक असर डाल रहा है. शिक्षाविदों की माने तो काले रंग की पाॅलीथिन दूषित प्लास्टिक से तैयार की जाती है, भविष्य में इसे रि-साइकिल नहीं किया जा सकता है. खाने पीने का सामान इस प्रकार के पाॅलीथिन में रखे जाने से वो दूषित व विषैला हो जाता है.पॉलीथिन से नाले हो रहे जाम, बारिश में होती है परेशानी
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग का असर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के नलों में देखा जा सकता है. शहरवासी हो या ग्रामीण यूं ही खुले में पॉलीथिन को फेंक देते हैं. पॉलीथिन धीरे धीरे नालियों तक पहुंच जाती है. यह गंदे पानी के बहाव को रोकने के साथ साथ कूड़ा कचरा को भी अपने में समाहित कर लेता है. यही पॉलीथिन व कूड़ा कचरा के कारण नाला नालियां जाम हो जाती है. दूषित पानी का सही प्रकार से बहाव नहीं होने के कारण नालियां बजबजाने लगतीं हैं. संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है. बारिश के मौसम में पॉलीथिन व कचरा सड़कों पर बहने लगता है. यह शहरवासियों व ग्रामीण क्षेत्राें के लिए मुसीबत बन जाता है.
कहते हैं नप के अधिकारी
प्लास्टिक की रोकथाम को लेकर अभियान चलाए जाते हैं. प्लास्टिक भी जब्त की जाती है. स्वच्छता पखवाड़ा में भी अभियान चलाया गया था. पुनः अभियान चलाकर इसकी रोकथाम को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा. प्लास्टिक प्रयोग हानिकारक है, जब भी घर से बाहर निकलें तो कपड़े से बना थैला लेकर निकलें. यह सिर्फ आपके लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए अच्छा साबित होगा.
अमरेन्द्र चौधरी नगर, कार्यपालक पदाधिकारी, नपडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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