दादा-दादी व नाना-नानी के सम्मान में सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यक्रम

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दादा-दादी व नाना-नानी के सम्मान में सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यक्रम

आधुनिकता की दौड़ में बच्चे अपने दादा-दादी और नाना-नानी के स्नेह और अनुभव से दूर होते जा रहे हैं. मोबाइल और वीडियो गेम्स की दुनिया ने पारिवारिक संवाद और परंपरागत कहानियों की जगह ले ली है.

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पाकुड़िया. सरस्वती शिशु मंदिर पाकुड़िया में शनिवार को दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के अध्यक्ष भुवनेश्वर नाथ ओझा, सचिव अमर प्रसाद भगत, कोषाध्यक्ष तारक शाह, अर्जुन प्रसाद और प्रधानाचार्य कुशल कुमार आचार्य ने की. सामूहिक वंदना के उपरांत आचार्य लखींद्र पाल ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में बच्चे अपने दादा-दादी और नाना-नानी के स्नेह और अनुभव से दूर होते जा रहे हैं. मोबाइल और वीडियो गेम्स की दुनिया ने पारिवारिक संवाद और परंपरागत कहानियों की जगह ले ली है. यह कार्यक्रम इसी दूरी को मिटाने और नयी पीढ़ी को अपने मूल से जोड़ने का एक प्रयास है. इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी के पैर धोकर, तिलक कर, माल्यार्पण और पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया. मुख्य अतिथि वरुण कुमार तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों को संस्कार देने और उन्हें पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने की जिम्मेदारी हम सभी की है. उन्होंने कहा कि बच्चे जो देखते हैं, वही सीखते हैं, इसलिए हमें अपने आचरण से उन्हें प्रेरणा देनी होगी. कार्यक्रम में प्रभाकर पाल, भारत पाल, विश्वरूप दास, किशोर कुमार गुप्ता, सनोज पाल, अभिषेक साहू, रुक्मिणी चौधरी, मिनीफ्रेंड टुडू, झरना दास, सोनू शाहा, विनोद प्रसाद भगत सहित अन्य मौजूद थे.

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