महेशपुर में भारतीय ज्ञान प्रणाली व एनइपी पर राष्ट्रीय सेमिनार 20 व 21 को
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 May 2026 5:21 PM
डिग्री महाविद्यालय महेशपुर में 20-21 मई 2026 को "भारतीय ज्ञान प्रणाली एनईपी 2020: संभावनाएं एवं चुनौतियां " पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित होगा। देश के विभिन्न विद्वान, प्रोफेसर, शोधार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता इसमें भाग लेंगे। सेमिनार में भारतीय ज्ञान परंपरा और नई शिक्षा नीति 2020 के पाठ्यक्रम में समावेशन पर चर्चा होगी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मो. मसूद अहमद के नेतृत्व में आयोजन सफल बनाने की तैयारियां पूरी की गई हैं। यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण माना गया है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली और एनईपी 2020 की संभावनाओं व चुनौतियों पर होगा अकादमिक विमर्श 20 मई फोटो कैप्शन – राष्ट्रीय सेमिनार को लेकर बैठक करते सेमिनार के अध्यक्ष सह प्राचार्य डॉ. मो. मसूद अहमद संवाददाता, पाकुड़ डिग्री महाविद्यालय महेशपुर में 20 एवं 21 मई 2026 को “भारतीय ज्ञान प्रणाली एनईपी 2020: संभावनाएं एवं चुनौतियां ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जायेगा. सेमिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रोफेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे. पांडिचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) बशीर अहमद खान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) ब्रजेश कुमार सिंह, मिल्लत कॉलेज दरभंगा के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र कुमार मिश्रा तथा रोहतास महिला कॉलेज सासाराम के मनोविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमन मुर्मू सहित कई विद्वान अपने विचार रखेंगे. तकनीकी सत्र में प्रतिभागी एवं शोधार्थी अकादमिक विमर्श भी करेंगे. महाविद्यालय प्रबंधन के अनुसार पाकुड़ जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित नए महाविद्यालय में राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार का आयोजन चुनौतीपूर्ण था. जुलाई 2024 से सत्र प्रारंभ होने के बावजूद संस्थान ने कम समय में इस आयोजन की तैयारी पूरी की है. सेमिनार के अध्यक्ष सह प्राचार्य डॉ. मो. मसूद अहमद के नेतृत्व में कन्वेनर डॉ. शैलेश मिश्रा, को-कन्वेनर प्रणव राज, आयोजक सचिव डॉ. राकेश कुमार दास, कोषाध्यक्ष अमित कुमार सोरेंग समेत महाविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के सहयोग से कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया है. कन्वेनर डॉ. शैलेश मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान और संस्कारों को भी महत्व देना समय की आवश्यकता है.
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