नगर परिषद में महिला मतदाता पुरुषों से आगे, कुूल वोटर 37 हजार पार

महिला मतदाताओं की यह बढ़त चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. चुनावी जानकारों का मानना है कि इस बार महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं, जिससे महिलाओं से जुड़े मुद्दे, सुरक्षा, योजनाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं.
चुनाव में वार्डवार गणित अहम, महिला मतदाता निभा सकती हैं निर्णायक भूमिका
सानू दत्ता, पाकुड़नगर परिषद क्षेत्र में होनेवाले चुनाव को लेकर मतदान की तिथि निर्धारित कर दी गयी है. नगर परिषद चुनाव के लिए 23 फरवरी को मतदान कराया जायेगा. जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार नगर परिषद के कुल 21 वार्डों में 37,033 मतदाता हैं. इनमें 18,356 पुरुष तथा 18,677 महिला मतदाता शामिल हैं. इस प्रकार महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से 321 अधिक है. महिला मतदाताओं की यह बढ़त चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. चुनावी जानकारों का मानना है कि इस बार महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं, जिससे महिलाओं से जुड़े मुद्दे, सुरक्षा, योजनाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं. मतदाता सूची के अनुसार वार्ड संख्या 1 से 21 तक सभी वार्डों का विवरण तैयार किया गया है. मूल मतदाता सूची के साथ अनुपूरक सूची के माध्यम से नये मतदाताओं को जोड़ा गया है, जबकि मृत्यु, स्थानांतरण और अन्य कारणों से कई नाम सूची से हटाये गये हैं.
हाई वोटर वार्ड बन सकते हैं निर्णायक
आंकड़ों के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है. इनमें वार्ड संख्या 16 (2207 मतदाता), वार्ड 14 (2119), वार्ड 21 (2114), वार्ड 4 (2020) और वार्ड 11 (1934) प्रमुख हैं. इन हाई वोटर वार्डों में जीत-हार का अंतर पूरे नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है. लो वोटर वार्डों में व्यक्तिगत संपर्क होगा अहम
वहीं दूसरी ओर कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या कम है, जिन्हें लो वोटर वार्ड की श्रेणी में रखा गया है. इनमें वार्ड 20 (1357), वार्ड 2 (1422), वार्ड 1 (1439), वार्ड 15 (1529) और वार्ड 5 (1541) शामिल हैं. चुनावी जानकारों के अनुसार इन वार्डों में व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं से सीधा संवाद निर्णायक साबित हो सकता है. यहां मामूली वोट अंतर भी नतीजा बदल सकता है. अध्यक्ष पद पर पड़ेगा वार्डवार गणित का असरविशेषज्ञों का कहना है कि वार्डवार मतदाता संख्या का सीधा असर नगर परिषद अध्यक्ष पद की चुनावी रणनीति पर पड़ता है. हाई वोटर वार्ड जहां मजबूत आधार तैयार करते हैं, वहीं लो वोटर वार्डों में मामूली चूक भी पूरे चुनाव का रुख बदल सकती है. इसी कारण अध्यक्ष पद के दावेदारों के लिए सभी वार्डों पर संतुलित फोकस रखना आवश्यक माना जा रहा है.
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