लापरवाही की भेंट चढ़ी शहरी पेयजलापूर्ति योजना
Updated at : 04 Sep 2015 8:14 AM (IST)
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उदासीनता : चार साल बीतने के बाद भी 31 करोड़ 61 लाख रुपये की योजना खटाई में, लोगों का सपना नहीं बना हकीकत पाकुड़ : शहर की सबसे प्रमुख शहरी पेयजलापूर्ति योजना सरकार व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण आज अधर में लटकी हुई है. कुल 31 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से निर्मित […]
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उदासीनता : चार साल बीतने के बाद भी 31 करोड़ 61 लाख रुपये की योजना खटाई में, लोगों का सपना नहीं बना हकीकत
पाकुड़ : शहर की सबसे प्रमुख शहरी पेयजलापूर्ति योजना सरकार व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण आज अधर में लटकी हुई है. कुल 31 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली शहरी पेयजलापूर्ति योजना लगभग चार साल बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है.
सरकारी उदासीनता के साथ-साथ संवेदक की लापरवाही की वजह से ही शहर की इतनी महत्वपूर्ण योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
जाने शहरी पेयजलापूर्ति योजना
पाकुड़ जिले के शहरी क्षेत्र के अधिकांश भाग में जल स्रोत की भारी कमी है. जिस कारण यहां पेयजल को लेकर बड़ी समस्या बनी रहती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने शहरी पेयजलापूर्ति योजना के तहत पश्चिम बंगाल के फुटीमारी फरक्का फीडर कैनल से पाइप लाइन के माध्यम से पाकुड़ सदर प्रखंड क्षेत्र के वल्लभपुर स्थित पावर ट्रीटमेंट प्लांट तक गंगा का पानी लाने की योजना बनाई है.
जहां से पानी का शुद्धीकरण के बाद कलिकापुर तथा रेलवे परिसर तांतीपाड़ा में बनी पानी टंकी तक लाया जाना है. जहां से मोटर के माध्यम से शहर के राज हाई स्कूल बाजार समिति में बने पानी टंकी तक पहुंचाने के बाद पाइप लाइन से शहर में सप्लाई किया जाना है.
रेलवे से अब तक नहीं मिली एनओसी
नगर परिषद पाकुड़ व पीएचइडी विभाग पाकुड़ की देख-रेख में बन रही उपरोक्त महत्वपूर्ण योजना में अब तक रेलवे द्वारा एनओसी नहीं मिली है.
विभागीय सूत्रों की मानें तो रेलवे से एनओसी लिये जाने को लेकर अब तक रेलवे को 2 करोड़ 68 लाख 23 हजार 656 रुपये का भुगतान कर दिया गया है. जिसके बाद रेलवे विभाग द्वारा एनओसी दिये जाने के संबंधित जिला प्रशासन को दी गयी सहमति में महज 10 साल तक का ही इकरारनामा कराये जाने की शर्त रखी गयी है.
जिसे लेकर जिला परिषद की ओर से पत्रांक 578 दिनांक 20.8.2015 को नगर विकास के सचिव झारखंड सरकार रांची को पत्र लिख कर सुझाव दिये जाने की मांग की है. बहरहाल जब तक उपरोक्त मामले में नगर विकास विभाग झारखंड सरकार रांची की ओर से कोई सुझाव नहीं मिलता है रेलवे से एनओसी प्राप्त करना संभव नहीं है.
अधूरा है पावर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य
शहरी पेयजलापूर्ति योजना के तहत पश्चिम बंगाल के फुटीमारी फरक्का फीडर कैनल से गंगा का पानी ला कर शहर के वल्लभपुर में पावर ट्रीटमेंट प्लांट में स्टोर करने की योजना है.
परंतु संवेदक द्वारा इकरारनामा के अनुसार निर्माण कार्य के समयावधि समाप्त हो जाने के बाद भी अब तक उपरोक्त प्लांट के निर्माण कार्य को पूरा नहीं किया जा सका है. ऐसे तो उपरोक्त योजना के तहत पश्चिम बंगाल स्थित फुटीमारी फरक्का फीडर कैनल से पाकुड़ शहर तक कुल 68 किलोमीटर तक पाईप लाईन बिछाने का काम किया जाना है. परंतु अब तक महज 47 प्रतिशत ही कार्य संवेदक द्वारा किया जा सका है.
कहां-कहां हुआ है पानी टंकी का निर्माण
विभागीय सूत्रों के मुताबिक शहरी पेयजलापूर्ति योजना का निर्माण करा रहे संवेदक मेसर्स दोसियन वेल्या वाटर सोल्यूशन प्राईवेट लिमिटेड अहमदाबाद द्वारा अब तक बाजार समिति परिसर में 1.75 लाख गैलन, राज हाई स्कूल के समीप 1.75 लाख गैलन तथा कलिका पुर में 75 हजार गैलन के पानी टंकी का निर्माण कराया जा चुका है.
गौरतलब हो कि वर्तमान नगर परिषद अध्यक्ष मीता पांडे ने वर्ष 2008 में झारखंड उच्च न्यायालय रांची में पीआईएल नंबर 1479 के तहत पाकुड़ शहर में पेयजलापूर्ति व्यवस्था कराये जाने को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी. जिसके बाद उच्च न्यायालय द्वारा सरकार को गंगा से पेयजलापूर्ति योजना के तहत शुद्ध पेयजल की व्यवस्था शहर को कराये जाने का निर्देश दिया था.
अतिरिक्त राशि भुगतान की मांग
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहरी पेयजलापूर्ति योजना को पूरा किये जाने में हावड़ा रेल मंडल के लगभग तीन किलोमीटर की जमीन पड़ती है. जिस कारण रेलवे से एनओसी लिये जाने की पहल के दौरान सर्वप्रथम रेलवे द्वारा उपरोक्त राशि भुगतान के अलावे रेलवे को 10 रुपये प्रति हजार लीटर के हिसाब से पानी सप्लाई किये जाने की शर्त रखी गयी थी.
जिस पर स्थानीय जिला प्रशासन ने अपनी सहमति जताई थी. परंतु वर्तमान में रेलवे में पानी सप्लाई को लेकर रेलवे परिसर तांतीपाड़ा में पानी टंकी निर्माण कराये जाने को लेकर जमीन के एवज में अतिरिक्त 34 लाख रुपये के भुगतान का डिमांड रेलवे प्रबंधन द्वारा किया गया है. जिस पर स्थानीय जिला प्रशासन विचार कर रहा है.
उपायुक्त ने कहा
उपायुक्त सुलसे बखला ने कहा कि शहरी पेयजलापूर्ति योजना को पूरा कराये जाने को लेकर प्रशासन काफी तत्पर है. हाल ही में रेलवे के अधिकारियों व संबंधित विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर अविलंब खामियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है. जल्द ही रेलवे द्वारा एनओसी दिये जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी.
कहते हैं पदाधिकारी
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता रास बिहारी सिंह ने बताया कि भूमि अधिग्रहण में हुई विलंब व रेलवे द्वारा एनओसी नहीं दिये जाने के कारण उपरोक्त योजना के पूर्ण होने में देरी हुई है. वर्तमान में संवेदक को अप्रैल 2016 तक का समय दिया गया है. संवेदक को समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है.
नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष ए गांगुली ने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने तत्कालीन नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन व तत्कालीन उपायुक्त सुनील कुमार सिंह के समय बाजार समिति परिसर में जलमीनार का शिलान्यास कराया था.
पूर्व मंत्री श्री सोरेन द्वारा उपरोक्त जल मीनार का शिलान्यास किये लगभग कई साल बित चुके हैं. बावजूद अब तक कार्य पूरा नहीं हो पाया है जो दु:ख की बात है. स्थानीय लोगों के बीच उम्मीद बनी थी परंतु अब यह सपना बन कर रह गया है.
– ए गांगुली
समाजसेवी मानस चक्रवर्ती ने कहा कि सरकार में इच्छाशक्ति की कमी है. शहरी पेयजलापूर्ति योजना महज खाता कलम में एक लंबी प्रक्रिया बन कर रह गयी है. रेलवे के भू-भाग को अगर छोड़ दिया जाय तो अब तक संवेदक द्वारा बाकी बचे स्थानों पर भी कार्य को पूरा नहीं किया जा सका है.
– मानस चक्रवर्ती
समाजसेवी राजीव पांडे ने कहा कि पेयजलापूर्ति योजना सेलोगों को काफी उम्मीद जगी थी. परंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी योजना पूरा नहीं होने से लोग अब मायूस हैं.
– राजीव पांडे
पूर्व मुखिया मदन गोंड ने कहा कि शहरी पेयजलापूर्ति योजना महज एक ढकोसला है. सरकार की नीति व पदाधिकारियों के लापरवाही के कारण ही लोग इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं.
– मदन गोंड
अधिवक्ता स्लेहा नाज ने कहा कि शहरी पेयजलापूर्ति योजना के पूर्ण होने से आमलोगों को काफी लाभ मिलता. परंतु उपरोक्त योजना के अधर में होने से लोगों की परेशानी बढ़ी है.
– स्लेहा नाज
कहतीं हैं नप अध्यक्ष
नगर परिषद अध्यक्ष मीता पांडे ने कहा कि रेलवे की उदासीनता के कारण अब तक एनओसी नहीं मिल पाया है. जिस कारण कार्य पूरा करने में कठिनाई हो रही है. नगर विकास विभाग झारखंड सरकार से उपरोक्त मामले को लेकर सुझाव की मांग की गई है. सुझाव मिलते ही आगे की कार्रवाई की जायेगी.
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