जमशेदपुर का पुलिस अस्पताल ‘बीमार’, 30 साल बाद खुला लेकिन 5 महीने में ही हुआ बदहाल

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Jamshedpur Police Hospital

जमशेदपुर के पुलिस अस्पताल का हाल बदहाल

Jamshedpur Police Hospital: जमशेदपुर के साकची में 30 साल बाद शुरू हुआ जिला पुलिस अस्पताल महज 5 महीनों में ही अवसाद में चला गया है. 10 लाख के खर्च और बड़े उद्घाटन के बावजूद यहां न डॉक्टर हैं, न दवा. देखिए, कैसे 2200 पुलिसकर्मी आज भी इलाज के लिए भटक रहे हैं और क्या है सिविल सर्जन का इस पर तर्क?

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जमशेदपुर, (श्याम झा की रिपोर्ट): 30 साल बाद बड़े दावों के साथ 3 अक्तूबर 2025 को शुरू किया गया जमशेदपुर के साकची का जिला पुलिस अस्पताल पांच माह में खुद ही अवसाद में चला गया है. यहां न डॉक्टर हैं, न नर्स, न दवा और न ही जांच की सुविधा है. सभी बेड खाली हैं. सुविधा के नाम पर सिर्फ बिजली है. लगभग 10 लाख की लागत से मरम्मत के बावजूद अस्पताल सिर्फ खाली इमारत बनकर रह गयी है, जबकि 2,200 पुलिसकर्मी आज भी इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं.

3 अक्तूबर 2025 को फिर से शुरु किया गया था अस्पताल

साकची शीतला मंदिर के पास स्थित जिले के एकमात्र पुलिस अस्पताल को 30 साल बाद फिर से 3 अक्तूबर 2025 को शुरू किया गया. उद्घाटन के दिन कुछ पुलिसकर्मियों की जांच भी की गयी, लेकिन पांच माह बीत जाने के बावजूद अबतक अस्पताल में एक भी डॉक्टर, नर्स और कम्पाउंडर की पोस्टिंग नहीं की गयी. अस्पताल में खून जांच की व्यवस्था भी नहीं है. सिविल सर्जन गाहे-बगाहे अस्पताल आते हैं. कुछ देर रुकने के बाद फिर वे अपने कार्यालय चले जाते हैं. अस्पताल में डॉक्टर का चैंबर बनाया गया है, लेकिन कुर्सी खाली पड़ी है. अस्पताल में बेड तो है, लेकिन इस पर मरीज नहीं हैं.

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वर्षों से खंडहर में तब्दील था यह अस्पताल

पूर्वी सिंहभूम जिले का इकलौता पुलिस अस्पताल वर्षों से खंडहर में तब्दील था. वर्तमान एसएसपी पीयूष पांडेय के प्रयास से अस्पताल का जीर्णोद्धार हुआ. रंगरोगन के अलावा चहारदीवारी बनी भी बनी. बेड और कुर्सियां भी व्यवस्थित की गयीं. उद्घाटन सत्र में रोटरी क्लब ने भी सहयोग किया, लेकिन 3 अक्तूबर के बाद से फिर इस अस्पताल की सुध लेने कोई नहीं पहुंचा. अस्पताल की देखभाल की जिम्मेवारी ट्रैफिक डीएसपी को दी गयी है. वर्तमान में दो पुलिसकर्मी भी तैनात किये गये हैं. पुलिसकर्मियों की मानें तो वे लोग 24 घंटे लोगों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं. लेकिन हमारे और हमारे परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा पर किसी का ध्यान नहीं है.

क्या कहते हैं पुलिस एसोसिएशन के सचिव और सिविल सर्जन

साकची में जिला का एकमात्र पुलिस अस्पताल है. लेकिन डॉक्टर और नर्स नहीं होने से पुलिसकर्मियों का इलाज नहीं हो पाता है. इसके अलावा गोलमुरी पुलिस केंद्र में भी एक अस्पताल की आवश्यकता है. ताकि पुलिसकर्मी या उनके परिवार के लोगों की तबीयत बिगड़ने पर इलाज हो सके.

बिजेंद्र कुमार, सचिव, पुलिस एसोसिएशन

जिला में डॉक्टर और नर्सों की कमी है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर और नर्स पुलिस अस्पताल में देना संभव नहीं है. फिलहाल चार लोगों को नियुक्त किया गया है. इसके अलावा मैं खुद वहां जाकर मरीज का इलाज करता हूं.

डॉ साहिर पाल, सिविल सर्जन, जमशेदपुर

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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