पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया पर स्वास्थ्य विभाग सख्त, लापरवाही पर प्रभारी, एएनएम और क्लीनिकों पर कार्रवाई

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पटमदा सीएचसी प्रभारी को शो-कॉज, पोटका में दो एएनएम पर गाज, सहिया बर्खास्त, एक क्लीनिक बंद, तीन को नोटिस

मलेरिया जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम | Prabhat Khabar Network

पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य विभाग सख्त। लापरवाही बरतने वाले सीएचसी प्रभारी, एएनएम और अवैध क्लीनिकों पर हुई बड़ी कार्रवाई।

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पूर्वी सिंहभूम जिले में पैर पसारते मलेरिया के प्रकोप के बीच स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में है. मलेरिया नियंत्रण, जांच और इलाज में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. इसी क्रम में शनिवार को पटमदा सीएचसी के प्रभारी को शो-कॉज, ड्यूटी से अनुपस्थित पोटका की दो एएनएम को नोटिस, लापरवाह सहिया को कार्यमुक्त और पोटका में बिना लाइसेंस संचालित निदान क्लीनिक को बंद करा तथा तीन क्लीनिक को गड़बड़ी मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

बता दें कि इससे पहले पोटका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ को निलंबित किया जा चुका है, जबकि 11 डॉक्टरों और एक एमटीएस को शो-कॉज जारी है.

जांच अभियान में उदासीन पाये गये पटमदा सीएचसी प्रभारीपटमदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार सिंह को जांच अभियान में उदासीनता बरतने के आरोप में कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है.

संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर होगी कार्रवाईसिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि स्पष्ट निर्देश के बावजूद पटमदा में अपेक्षित संख्या में मलेरिया जांच नहीं की जा रही थी, जिसे घोर लापरवाही माना गया है. यदि प्रभारी का जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध विभागीय स्तर पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा.

पोटका : कार्य में लापरवाही मिलीं दो एएनएम, अपना काम नहीं कर रही थी सहिया

सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण के दौरान पोटका प्रखंड में बड़ी लापरवाही उजागर हुई. ड्यूटी से गायब पायी गयी एएनएम ज्योति कुमारी और अंजेला मिंज को कार्य में लापरवाही के आरोप में 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है. वहीं, कड़ियाशाही गांव की सहिया लक्ष्मी सरदार को मलेरिया रोकथाम और जागरुकता अभियान को छोड़कर दूसरे कार्यों में लिप्त पाया गया. इसे गंभीर चूक मानते हुए उन्हें तत्काल कार्य से हटाने (सेवामुक्त करने) का निर्देश दिया गया है.

बिना पंजीकरण चल रहे अवैध क्लीनिकों पर शिकंजा, नहीं कर रहे थे समुचित जांचसिविल सर्जन डॉ साहिर पाल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पोटका के निरीक्षण के बाद विभिन्न निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का औचक निरीक्षण किया. बिना लाइसेंस अवैध रूप से संचालित निदान क्लीनिक को बंद करा दिया गया. वहीं, मानव बंधु क्लीनिक, मनसा भक्त क्लीनिक और राजाबाला क्लीनिक (शंकरदा) में कई गड़बडी मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. निरीक्षण में पाया गया कि ये संस्थान क्लिनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत बिना किसी प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से संचालित हो रहे थे. यहां मरीजों की समुचित जांच भी नहीं की जा रही थी.

डॉक्टर पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके, तीन दिनों का समय मिला वहां मौजूद कथित डॉक्टर मेडिकल काउंसिल का कोई भी पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके, जो एक्ट की धारा-11 का सीधा उल्लंघन है. सिविल सर्जन ने इन्हें प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तीन दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्लीनिक में मिली एक्स-रे मशीन का लाइसेंस नहीं थावहीं, निरीक्षण के दौरान मानव बंधु क्लीनिक में एक एक्स-रे मशीन मिली, जिसके लिए आवश्यक लाइसेंस उपलब्ध नहीं था. इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित क्लीनिक से स्पष्टीकरण मांगा है. विभाग ने स्पष्ट किया कि बिना वैध अनुमति चिकित्सा उपकरणों का संचालन नियमों का उल्लंघन है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी. सिविल सर्जन ने कहा कि जिले में बिना क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के पंजीकरण के संचालित अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जायेगी. निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुकांतो शीट, डॉ सत्यनारायण भगत, कार्यक्रम प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे.

झोलाछाप डॉक्टरों और झाड़-फूंक ने बिगाड़े हालात, इसी कारण पांच बच्चों की गयी जान

झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तैयार कर सघन जांच अभियान चलेगास्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में फैले ब्रेन मलेरिया और उससे होने वाली मौतों के लिए सीधे तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों और अंधविश्वास को जिम्मेदार माना है. विभाग के अनुसार, पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया से जितने भी मरीजों की मृत्यु हुई है, उन सभी का प्राथमिक इलाज झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा किया गया था. इसके साथ ही परिजनों ने समय गंवाकर झाड़-फूंक भी करायी थी. जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ गयी और मरीज गंभीर हो गये, तब उन्हें सीएचसी, सदर अस्पताल या एमजीएम रेफर किया गया. इस जानलेवा लापरवाही को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब क्षेत्र के सभी झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है.


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