पारंपरिक बीजों को बचाकर और पुनः उपयोग कर हम ग्लोबल वार्मिंग को दूर कर सकते हैं : मनोरमा एक्का
Author Vikash nath
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छतरबगीचा स्थित होप कार्यालय के हाॅल में फीमी और होप के संयुक्त तत्वावधान में किस्को प्रखंड के खरकी और परहेपाट पंचायत की 34 महिलाएं एवं किशोरियों तथा स्थानीय नेतृत्वकर्ताओं की एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी.
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महिलाओ, किशोरियों तथा स्थानीय नेतृत्वकर्ताओं के लिए कार्यशाला लगी
लोहरदगा. छतरबगीचा स्थित होप कार्यालय के हाॅल में फीमी और होप के संयुक्त तत्वावधान में किस्को प्रखंड के खरकी और परहेपाट पंचायत की 34 महिलाएं एवं किशोरियों तथा स्थानीय नेतृत्वकर्ताओं की एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, पहनावा, खेल और पारंपरिक बीजों का संरक्षण एवं संवर्द्धन करना था. कार्यशाला में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मैनेजिंग ट्रस्टी मनोरमा एक्का ने कहा कि आप सभी महिला नेतृत्वकर्ता आदिवासी संस्कृति और पहचान को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. वर्तमान समय में आदिवासी समाज की भाषा और संस्कृति पर कई तरह की चुनौतियां हैं, जिनका मिलकर विरोध करना आवश्यक है. इस कार्यक्रम के अंतर्गत लोहरदगा जिला के चार प्रखंडों के आठ पंचायतों में कार्यशाला आयोजित की जा रही है. इसी क्रम में यह तीसरा आयोजन था. इसमें प्रतिभागियों को पारंपरिक बीजों के संवर्धन और उपयोग पर जानकारी दी गयी. साथ ही अंधविश्वास, बाल विवाह, बाल दुर्व्यापार जैसी सामाजिक बुराइयों पर चर्चा हुई. प्रतिभागियों को चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), 100 नं. और 108 जैसी सेवाओं के बारे में भी बताया गया. कार्यशाला में उपस्थित महिलाओं और किशोरियों ने अपनी भाषा, संस्कृति और पारंपरिक बीजों को बचाने का संकल्प लिया. इस आयोजन को सफल बनाने में मनोरमा एक्का, अरविन्द वर्मा, उज्ज्वल कुशवाहा, प्रेममणि कुजूर, गीता बिरहोर और अन्य ने सक्रिय भूमिका निभायी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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