दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना प्राथमिकता : डीइओ

दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना प्राथमिकता : डीइओ
लोहरदगा़ झारखंड शिक्षा परियोजना के तहत जिले के शिक्षकों, शैक्षणिक प्रशासकों और अभिभावकों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी. कार्यक्रम का उद्घाटन डीइओ दास सुनंदा चंद्रमौलेश्वर, एडीपीओ मोनीदीपा बनर्जी और प्रभाग प्रभारी एमलीन सुरीन ने संयुक्त रूप से किया. मौके पर डीइओ ने समावेशी शिक्षा को सफल बनाने में शिक्षकों और अभिभावकों की महती भूमिका पर प्रकाश डाला. दिव्यांग बच्चों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी : डीइओ ने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं के दिव्यांग बच्चों के प्रति शिक्षकों को अधिक सतर्क और संवेदनशील होना होगा. कार्यशाला का उद्देश्य समुदाय और अभिभावकों को संवेदीकृत कर समावेशी शिक्षा के प्रति जागरूक करना था. विशेष शिक्षकों की भूमिका साधन सेवी के रूप में तय की गयी है ताकि इन बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके. गंभीर श्रेणी के बच्चों को मिलेगा गृह आधारित प्रशिक्षण : प्रभाग प्रभारी एमलीन सुरीन ने बताया कि दिव्यांगता की श्रेणी के आधार पर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना है. अल्प श्रेणी के दिव्यांग बच्चों को स्कूलों में नामांकित कर नियमित अनुश्रवण किया जायेगा. वहीं, गंभीर एवं अति गंभीर श्रेणी के बच्चों के लिए गृह आधारित प्रशिक्षण के साथ-साथ सहायक सामग्रियां प्रदान की जायेंगी. एडीपीओ मोनीदीपा बनर्जी ने बच्चों के सूक्ष्म अवलोकन पर जोर देते हुए कहा कि विद्यालयों में उनकी निरंतरता बनाये रखने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं. उपस्थित प्रतिभागियों ने बच्चों को जोड़ने का विश्वास दिलाया. कार्यशाला में सभी प्रखंडों के शिक्षक, बीपीओ, बीआरपी, सीआरपी और अभिभावक उपस्थित थे.
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