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लरका आंदोलन के सात जांबाजों ने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें, लेकिन आंदोलनकारी ने ही दिया था धोखा

Updated at : 02 Feb 2022 2:15 PM (IST)
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लरका आंदोलन के सात जांबाजों ने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें, लेकिन आंदोलनकारी ने ही दिया था धोखा

लरका आंदोलन के प्रणेता वीर बुधू भगत, हलधर-गिरधर भगत, बहन रूनिया व झुनिया समेत सात जांबाजों ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें अपने अदम्य साहस से हिला दी थी.

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लरका आंदोलन के प्रणेता वीर बुधू भगत, हलधर-गिरधर भगत, बहन रूनिया व झुनिया समेत सात जांबाजों ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें अपने अदम्य साहस से हिला दी थी. दो साल तक अंग्रेजी सेना सात जाबांजों को पकड़ने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती रही, लेकिन सफलता नहीं मिली. लरका आंदोलन के जांबाजों ने अंग्रेजी सेना के कई हथियार व गोला बारूद डिपो को उड़ा दिया था.

साथ ही कई अंग्रेजी सेना के कमांडर को मार गिराया था. सात वीर जवानों को पकड़ने के लिए अंग्रेजी सेना ने इनाम घोषित कर रखी थी. धोखे से सात जांबाज पकड़े गये और सभी को एक ही रस्सी में बांधते हुए कत्लेआम कर दिया गया था. लरका आंदोलन के जाबांजों की याद में हर साल दो फरवरी को टिको पोखराटोली में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन करते हुए वीर जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किया जाता है.

अंग्रेजी सेना व आंदोलनकारियों के बीच जम कर युद्ध हुआ. लरका आंदोलन का नेतृत्व बीर बुधू भगत कर रहे थे. इस बीच एक फरवरी की देर रात कुड़ू के जंगी बगीचा, जहां सातों वीर जाबांज बीर बुधू भगत, हलधर भगत, गिरधर भगत, बहन रूनिया व झुनिया समेत तीन जवान शामिल थे. सभी आराम कर रहे थे. इनाम के लालच में आंदोलन से जुड़े एक आंदोलनकारी ने अंग्रेजी हुकूमत को सूचना दी कि सातों आंदोलनकारी जंगी बगिचा में आराम कर रहे हैं.

एक फरवरी की वह मनहूस काली रात को अंग्रेजी हुकूमत लाव लश्कर के साथ जंगी बगिचा को चारों तरफ से घेर लिया. सातों आंदोलनकारियों को अंग्रेजी सेना ने पकड़ लिया. बीर बुधू भगत उस समय दूसरी टीम में थे. सभी सात आंदोलनकारियों जिनमें बीर बुधू भगत के दो पुत्र हलधर भगत व गिरधर भगत, बहन रूनिया व झुनिया समेत तीन अन्य आंदोलनकारियों को टिको पोखराटोली अंग्रेजी हुकूमत अपने कैंप में ले गयी.

सातों के साथ काफी अत्याचार किया गया तथा दो फरवरी की अहले सुबह सभी सातों को टिको पोखराटोली के समीप जोड़ा बर के पेड़ में एक रस्सी से बांधते हुए कत्लेआम कर दिया गया. तब से दो फरवरी को श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन होते आ रहा है. हर साल दो फरवरी को टिको पोखराटोली में लरका आंदोलन के शहीदों की याद में श्रद्धासुमन अर्पित करने को लेकर श्रद्धांजलि समारोह कर श्रद्धांजलि दी जाती है.

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