लोहरदगा़ जिले में बर्फीली हवाओं के चलने से ठंड में भारी इजाफा हुआ है. तापमान में अचानक आयी गिरावट के बाद लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गयी है. कनकनी का आलम यह है कि सूरज निकलने के काफी देर बाद ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं. ठंड से बचने के लिए लोग दिन भर स्वेटर, जैकेट, टोपी और मफलर में लिपटे नजर आ रहे हैं. मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों पर दोहरी मार : ठंड का सबसे ज्यादा असर रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों पर पड़ा है. ग्रामीण इलाकों से सुबह नौ बजे के पहले शहर पहुंचने वाले मजदूरों को कड़ाके की ठंड में काम की तलाश करनी पड़ रही है. निर्माण कार्यों की गति धीमी होने के कारण कई मजदूरों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. शाम छह बजे काम बंद होने के बाद कड़ाके की ठंड में वापस घर पहुंचना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. वनांचली क्षेत्रों में नारकीय स्थिति : जिले के वनांचली इलाकों में रहने वाले लोग सबसे अधिक परेशान हैं. जंगलों और नदी-नालों से होकर बहने वाली सर्द हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है. पर्याप्त गर्म कपड़ों के अभाव में ग्रामीण रात भर आग तापकर समय बिता रहे हैं. ग्रामीणों को न केवल खुद की, बल्कि अपने पालतू मवेशियों को भी ठंड से बचाने की चिंता सता रही है. चिकित्सकों की सलाह, गर्म पानी और ताजे भोजन का करें सेवन : बढ़ती ठंड को देखते हुए सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है. डॉक्टरों ने कहा है कि लोग पर्याप्त कपड़े पहनकर ही घर से निकलें और बिना काम के बाहर न घूमें. खान-पान में गर्म पानी और ताजे गर्म भोजन का उपयोग करें. यदि ठंड लगने के लक्षण दिखे, तो देसी उपचार के भरोसे रहने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचकर इलाज करायें.
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