ePaper

Chhath Puja: UP, MP से लेकर बिहार तक जाता है झारखंड के इस गांव का बना सूप, दउरा और बेना, मन की बात कार्यक्रम में हो चुका है प्रसारण

Updated at : 04 Nov 2024 9:20 AM (IST)
विज्ञापन
सूप और दउरा बनाते ग्रामीण

सूप और दउरा बनाते ग्रामीण

लोक आस्था के महापर्व छठ के मौके पर मसियातू में बने सूप की विशेष मांग होती है. गांव मे वार्ड सदस्य से लेकर बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे सभी सूप, दउरा तथा बेना बनाने मे माहिर है.

विज्ञापन

Chhath Puja, कुड़ू(लोहरदगा), अमित कुमार राज: लोक आस्था का महापर्व छठ व्रत को लेकर छठव्रती तैयारी मे लगे हुए हैं. सलगी पंचायत स्थित मसियातू गांव के 46 परिवार छठ व्रत के मौके पर बांस से बनने वाले सूप, दउरा व बेना से लेकर छठ व्रत में इस्तेमाल होने वाले बांस के सामान बनाने मे जुट गये हैं. मसियातू में बने सामान की मांग झारखंड के विभिन्न जिलों से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा,छतीसगढ़ से लेकर अन्य राज्यों तक मसियातू में बने सूप, दउरा तथा बेना की आपूर्ति होती है.

बताया जाता है कि सलगी पंचायत के मसियातू गांव में तुरी समाज के 46 परिवार निवास करते हैं. सभी परिवार छठ महापर्व के मौके पर पूजा में प्रयोग होने वाला सामान बनाते हैं. लोक आस्था के महापर्व छठ के मौके पर मसियातू में बने सूप की विशेष मांग होती है. गांव मे वार्ड सदस्य से लेकर बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे सभी सूप, दउरा तथा बेना बनाने मे माहिर है.

एक माह पहले खरीदकर लाते हैं बांस

मसियातू गांव में बने सामान की मांग ज्यादा है. एक माह पहले से पूरा परिवार सूप, दउरा तथा बेना बनाने के काम मे लग गये हैं. पुरुष जहां बांस का जुगाड़ करते है,बच्चे बांस को काटने से लेकर सूप बनाने के लिए बांस को फाड़ते हैं, तो दूसरी तरफ महिलाएं सूप, दउरा तथा बेना बनाती है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सभी 46 परिवार छठ महापर्व के मौके पर सूप, दाउरा व बेना समेत अन्य सामान बनाते हैं. एक माह पहले सभी समान का जुगाड़ कर लेते हैं. ग्रामीण चुंदेश्वर तुरी, किशुन तुरी, गंगा तुरी, मनोज तुरी, मोहन तुरी, निरूष तुरी, सचित तुरी , झरी तुरी , बिनोद तुरी, गुरुचरण तुरी, बिरेंद्र तुरी, दिलमोहन तुरी, बुधना तुरी ने बताया कि एक माह पहले बांस खरीदकर लाते हैं.

एक सूप में 40 रुपये का होता है मुनाफा

कुड़़ू के साथ-साथ जिले के दूसरे प्रखंडों भंडरा, कैरो, सेन्हा गुमला जिले के सिसई, गुमला व रांची जिले के बेड़ो, नरकोपी, नगड़ी तथा अन्य गांवों से बांस लाते हैं. महिलाओं सालो देवी, एतवारी देवी, शीला कुमारी, बुधनी देवी, सुशांति देवी, संपति देवी, राजवंती देवी, होलिका देवी, दुर्गी देवी, जतरी देवी समेत अन्य ने बताया कि सूप, दाउरा तथा बेना बनाते हैं. मासियातू में बने बांस के सामानों की खरीदने के लिए लातेहार, डालटनगंज, गढ़वा, गुमला व रांची से व्यपारी आते हैं. यहां से एक साथ सूप, दाउरा, बेना तथा अन्य सामान को ले जाते हैं.

मसियातू गांव पहुंचे व्यापारी ने बताया कि यहां से सूप, दउरा लेकर गढ़वा जाते हैं, वहां से बिहार, उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश के भोपाल, सतना, मंदसौर, इंदौर तक सूप भेजते हैं. एक सूप बनाने में लागत 130 रुपये से लेकर 140 रुपये तक आता है. जबकि व्यापारी 160 रुपये से लेकर 170 रुपये में एक सूप लेकर जाते हैं. एक सूप बनाने के बाद बेचने पर लगभग 40 रुपये का मुनाफा होता है. मासियातू के ग्रामीण साल भर बांस से बने सामान बनाते हैं.

प्रधानमंत्री मन की बात कार्यक्रम में हो चुका है प्रसारण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात कार्यक्रम में मासियातू गांव मे बांस से बनने वाले सूप, दाउरा, बेना, सोफा सेट से लेकर पेन स्टैंड तथा अन्य सामान का सीधा प्रसारण है चुका है. इतना हीं नहीं सीधा प्रसारण में मासियातू के ग्रामीणों द्वारा बनाये जा रहा सामान की झलक भारत देश के साथ-साथ विदेश के लोग देख चुके हैं.

Read Also: Bihar News: बिहार की ट्रेनों में किन्नर और बदमाशों का आतंक, छठ में घर आ रहे यात्रियों पर कर रहे हमले

विज्ञापन
Nitish kumar

लेखक के बारे में

By Nitish kumar

Nitish kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola