न बिजली, न सड़क, न पानी, न ही योजना

Updated at : 19 Jul 2019 1:35 AM (IST)
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न बिजली, न सड़क, न पानी, न ही योजना

बदहाली : बुनियादी सुविधा नहीं रहने के कारण लोग जंगल में असुरक्षित महसूस करते हैं किस्को : किस्को प्रखंड क्षेत्र के हिसरी पंचायत के रंनगड़ा एवं खम्हण के लोग आज भी बिजली, पानी एवं सड़क जैसे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. रंनगड़ा एवं खम्हण में लगभग 50 परिवार के 500 से अधिक लोग निवास करते […]

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बदहाली : बुनियादी सुविधा नहीं रहने के कारण लोग जंगल में असुरक्षित महसूस करते हैं

किस्को : किस्को प्रखंड क्षेत्र के हिसरी पंचायत के रंनगड़ा एवं खम्हण के लोग आज भी बिजली, पानी एवं सड़क जैसे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. रंनगड़ा एवं खम्हण में लगभग 50 परिवार के 500 से अधिक लोग निवास करते हैं. लेकिन गांव में किसी तरह के कोई सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. शौचालय कुछ घरों में बना है.
वहीं लोगों का गांव तक जाने के लिए सड़क भी नहीं है. जिससे ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय जाने में काफी परेशानी होती है. लोग को कुछ काम होने पर एक दिन पहले ही लोहरदगा या प्रखंड मुख्यालय आना पड़ता है. गांव में पानी के लिए भी लोग दर दर भटकते हुए नजर आते हैं. खास कर गर्मी में काफी परेशानी होती है. गांव के लोग डोभा, तालाब और चुंआ के गंदे पानी पीने को मजबूर हैं. लोग जिस पानी से नहाते है उसी पानी से बर्तन धोते हैं, और वहीं का पानी पीते हैं.
गांव का चापानल वर्षों से खराब पड़ा है. पंचायत समिति सदस्य सुखराम भगत, ग्रामीण सिमोन भगत, परशुराम उरांव, गोवर्धन भगत, अनिल भगत, रामेश्वर उरांव, बीरेश उरांव एवं अन्य ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी की काफी समस्या है. गांव के लोग गंदे पानी पीने को विवश हैं. कई बार जलमीनार के लिए मुखिया को आवेदन दिया जा चुका है एवं ग्रामसभा द्वारा भी पास कराया जा चुका है. परंतु आज तक जलमीनार का निर्माण नहीं कराया गया.
ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया बस चुनाव के समय वोट लेने आती है चुनाव के बाद कभी नजर नहीं आती, जबकि प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि आज तक गांव में कदम नहीं रखे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बिजली तो दूर है, गांव में बिजली का पोल भी नहीं गाड़ा गया है. यहां के लोग आज भी ढिबरी युग में जी रहे है.
कई बार ग्रामीणों द्वारा बिजली, पानी, आवास एवं अन्य सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन दिया. कई बार जनता दरबार में भी अपना फरियाद अधिकारियों के समक्ष रखे. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आज तक एक भी प्रधानमंत्री आवास नहीं बनाया गया है. जबकि विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन एवं अन्य योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पाया है. इस बात को भी जनता दरबार में ग्रामीणों द्वारा रखा गया था. लेकिन कोई फायदा नहीं.
ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालय या जिला कार्यालय में कुछ काम होने पर जंगलों के खराब रास्ते से आने जाने में काफी परेशानी होती है. सड़क जर्जर होने के कारण डिलीवरी के समय मरीज को अस्पताल ले जाने में काफी परेशानी होती है. गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था की बदहाली भी किसी से छुपी हुई नहीं है. गांव के बच्चे शिक्षा के अभाव में इधर उधर भटकते नजर आते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सही प्रकार से विद्यालय का संचालन नहीं होता है. कभी-कभी विद्यालय 12 बजे खुलते हैं, तो कभी हाजिरी बना कर बच्चों को छुट्टी कर दी जाती है.
गांव में आंगनबाड़ी केंद्रों को भी स्थिति बदतर है. गांव में एक भी गैस कनेक्शन नहीं दिया गया है. सड़क निर्माण एवं अन्य समस्या के लिए कई बार सांसद, विधायक को भी पत्र लिखा जा चुका है. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. गांव में बुनियादी सुविधा नहीं रहने के कारण लोग जंगल में असुरक्षित महसूस करते हैं. हर समय लोगों को जानवरों एवं अन्य चीजों का भय लगा रहता है. रंनगड़ा के ग्रामीण संतोष लोहरा, शिवराम लोहरा, मदन लोहरा, नंदलाल लोहरा, कैलाश देवी, बलदेव लोहरा एवं अन्य लोगों का कहना है कि गांव में सड़क नहीं होने के कारण गांव में कोई आना नहीं चाहता है.
खासकर शादी विवाह के मामलों में बेटियों की शादी करने में काफी परेशानी होती है. सड़क नहीं होने के कारण गांव में कोई शादी करना नहीं पसंद करता है. इस संबंध में मुखिया संगीता उरांव का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव तक प्रतिनिधि को जाने में परेशानी होती है. जिस कारण गांव में नहीं जा पाते है.
उन्होंने कहा कि गाड़ी नहीं जाने के कारण जल मीनार निर्माण नहीं किया जा सका है एवं प्रधानमंत्री आवास की दूसरी सूची 0 टैग करके भेज दिया गया है. जर्जर सड़क को लेकर कई बार जिला स्तर में बात रखी गई है. बीडीओ संदीप भगत का कहना है कि राशन कार्ड संबंधित विभाग को जानकारी देकर काम कराया जायेगा. प्रधानमंत्री आवास के लिए सूची में नाम रहने के बाद आवास दिया जायेगा एवं जांच कर सभी मुद्दों पर काम किया जायेगा.
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