नौ माह बाद भी 42 हजार विद्यार्थियों को नहीं मिला स्वेटर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 16 Dec 2024 8:25 PM
जिले के बारियातू, बालूमाथ व हेरहंज प्रखंड के सरकारी स्कूल में पढ़नेवाले करीब 42 हजार विद्यार्थियों के बीच ससमय ड्रेस, स्वेटर व जूता-मोजा का वितरण नहीं हो पाया है
सुमित कुमार/अरशद आजमी, बारियातू
जिले के बारियातू, बालूमाथ व हेरहंज प्रखंड के सरकारी स्कूल में पढ़नेवाले करीब 42 हजार विद्यार्थियों के बीच ससमय ड्रेस, स्वेटर व जूता-मोजा का वितरण नहीं हो पाया है. इन दिनों कड़ाके की ठंड के बावजूद बच्चे परेशान है. बगैर स्वेटर स्कूल आने को मजबूर है. दिसंबर माह में 16 दिन गुजर गये. इस ठंड में कई ऐसे विद्याथी है, जिनके पास ड्रेस, स्वेटर व जूता-मोजा नहीं है. वे ऐसे ही स्कूल जाने को मजबूर है. ज्ञात हो कि बालूमाथ में 92, बारियातू में 88 व हेरहंज में 73 प्राथमिक व मध्य सरकारी स्कूल है.क्या है प्रावधान
राज्य परियोजना परिषद की पहल पर हर वर्ष सरकारी स्कूल में पढ़नेवाले विद्यार्थियों को दो जोड़ी ड्रेस, एक स्वेटर व एक जोड़ी जूता-मोजा देने का प्रावधान है. इसके लिए एक विद्यार्थी पर करीब छह सौ रूपये खर्च करने है. नियमानुसार यह व्यवस्था विद्यार्थियों को हर वर्ष अप्रैल माह में सत्र शुरू होने के बाद से मिलना सुनिश्चित किया गया है. कक्षा एक व दो में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए उक्त सामग्री की राशि स्कूल के प्रबंधन समिति के खाते में भेजी जाती है. जबकि कक्षा तीन से आठवीं तक के अध्ययनरत बच्चों के सामग्री की राशि उनके बैंक खाते में भेजने का प्रावधान है. वर्ष 2024-25 में दिसंबर के 16 दिन गुजर गये. करीब नौ माह गुजरने के बाद भी उक्त तीनों प्रखंड के कुल 253 स्कूल में अध्यनरत करीब 42 हजार विद्यार्थियों को जरूरत की सामग्री व राशि नहीं मिली है. समय पर ड्रेस, स्वेटर व जूता-मोजा का वितरण नहीं होने से विद्यार्थी व अभिभावक दोनों ठगा महसूस कर रहे है. बताते चले कि पूरे प्रक्रिया में ठेकेदारी प्रथा हावी है. सीधे स्कूलों में ड्रेस सप्लाई करने को लेकर पुरी प्रक्रिया शिथिल बनाकर रखी जाती है.क्या कहते हैं अधिकारीइस संबंध में बारियातू बीइइओ नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कक्षा एक व दो में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए संबंधित स्कूल के प्रबंधन समिति के खाते में राशि भेजी जा रही है. वहीं तीन से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए राशि उनके खाते में जिला द्वारा ट्रांसफर किया जा रहा है. एक सप्ताह के भीतर बच्चों को यह उपलब्ध हो जायेगा.
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