वार्षिक चैत हरैया पशु मेला जिला परिषद की लापरवाही व आपसी वर्चस्व की चढ़ा भेंट

Published by :VIKASH NATH
Published at :08 Apr 2025 7:41 PM (IST)
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वार्षिक चैत हरैया पशु मेला जिला परिषद की लापरवाही व आपसी वर्चस्व की चढ़ा भेंट

प्रखंड के शुक्रबाजार टांड़ परिसर में लगनेवाले प्रसिद्ध व परंपरागत वार्षिक चैत हरैया पशु मेला इस वर्ष जिला परिषद की लापरवाही व स्थानीय संवेदकों बीच वर्चस्व की भेंट चढ़ गया.

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फोटो : 8 चांद 5 : मेला को लेकर पशु व्यापारी पेशोपेश में. प्रतिनिधि चंदवा . प्रखंड के शुक्रबाजार टांड़ परिसर में लगनेवाले प्रसिद्ध व परंपरागत वार्षिक चैत हरैया पशु मेला इस वर्ष जिला परिषद की लापरवाही व स्थानीय संवेदकों बीच वर्चस्व की भेंट चढ़ गया. ज्ञात हो कि यह पशु मेला आसपास के क्षेत्रों में काफी प्रसिद्ध था. यहां लातेहार, लोहरदगा समेत दूर-दराज से लोग उन्नत किस्त के पशु लेने आते थे. कई लोगों को रोजगार मिलता था, पर पिछले पांच-छह वर्ष से बोली बढ़ने के कारण मेला व बाजार महंगा होता चला गया. यह मेला पूरी तरह से बर्बाद हो गया. यह मेला चैत माह से शुरू होता था. रामनवमी के बाद यह समाप्त हो जाता था. इस वर्ष भी कुछ पशु व्यापारी यहां पशुओं के साथ पहुंच गये है, पर अब तक मेला नहीं लगने के कारण वे पशोपेश में है. इस परंपरागत पशु मेला का आस्तित्व ही खत्म होने को है. क्या है मामला पहले सैरात की राशि कम होती थी. इसलिए इसकी खुली डाक चंदवा अंचल से ही हो जाती थी. पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय संवेदकों के बीच तनातनी व वर्चस्व को लेकर सैरात की राशि डाक में काफी बढ़ गयी. इसके बाद इसकी निविदा जिला परिषद लातेहार में होने लगी. इस वर्ष हरैया पशु मेला, साप्ताहिक शुक्रवारीय हाट व श्रावणी मेले की खुली डाल को एक साथ कर निविदा की शुरुआती बोली 33 लाख 70 हजार 650 रुपये हो गयी. तीन बार निविदा जारी किए जाने के बाद भी कोई बोली लगाने नहीं आया. इसके बाद एक अप्रैल से जिला परिषद की पहल पर विभागीय वसूली कराई जा रही है. विभाग के आदेश ज्ञापांक 231 दिनांक 29 मार्च 2025 के आलोक में इस वित्तीय वर्ष के लिए मो शाहिद पिता मो क्यामुद्दीन को इस वसूली के लिए प्राधिकृत किया गया है. लगातार डिपार्टमेंटल वसूली, बिचौलिये उठा रहे लाभ वर्ष 2020-21 में यह मेला कोरोना काल की भेंट चढ़ गया. वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव व 2024 में लोकसभा चुनाव के कारण बोली लगाने के बाद भी निविदा लेने वाले लोगों ने मेला विभाग को सरेंडर कर दिया. इसके बाद विभागीय स्तर पर राशि वसूली शुरू हुई. कुछ बिचौलिये राजनीतिक पकड़ का फायदा उठाते हुए इसका खूब लाभ उठा रहे है. जान बूझकर हर वर्ष विभागीय वसूली की ही पटकथा लिखी जाती है. बताते चलें कि बाजार समिति भंग कर दिया गया है. साप्ताहिक हाट, चैत पशु मेला व श्रावणी मेला की निविदा एक साथ करने से निविदा की राशि बढ़ गयी है. क्या कहते है जिप उपाध्यक्ष व प्रधान लिपिक जिला परिषद उपाध्यक्ष अनिता देवी ने दूरभाष पर बताया कि मामले की जानकारी नहीं थी. प्रभारी अधिकारी प्रभात कुमार से इस मामले पर बात कर चैत पशु मेला की निविदा अकेले कराने की पहल होगी. जिला परिषद के प्रधान लिपिक संतोष सिंह ने बताया कि निविदा निकाली गयी थी, पर किसी ने निविदा नही भरा. इसके बाद विभाग के द्वारा वसूली करायी जा रही है. वर्तमान में विभाग द्वारा प्रति सप्ताह 20 हजार रुपये की वसूली की जा रही है.

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