मानदेय मिलता, तो बच सकती थी शांति
Updated at : 30 Jan 2018 8:03 AM (IST)
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चंदवा : प्रखंड के हुटाप संकुल अंतर्गत उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय कुंहिया आटा में कार्यरत पारा शिक्षिका शांति देवी पति सोइराई भगत की मौत सोमवार की तड़के रांची स्थित एक अस्पताल में हो गयी. मौत की खबर सुन परिजन स्तब्ध हो गये. पारा शिक्षकों में शोक की लहर दौड़ गयी. वह कई दिनों से बीमार चल […]
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चंदवा : प्रखंड के हुटाप संकुल अंतर्गत उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय कुंहिया आटा में कार्यरत पारा शिक्षिका शांति देवी पति सोइराई भगत की मौत सोमवार की तड़के रांची स्थित एक अस्पताल में हो गयी. मौत की खबर सुन परिजन स्तब्ध हो गये. पारा शिक्षकों में शोक की लहर दौड़ गयी.
वह कई दिनों से बीमार चल रही थी. शिक्षिका के निधन पर परिवार में दुखों का पहाड़ टूट गया है. तीन बच्चों की परवरिश का जिम्मा दिव्यांग पिता सोइराई भगत पर आ गया है. घटना की सूचना के बाद पारा शिक्षक संघ के सदस्यों ने दो मिनट का मौन रख मृत आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना की. संघ के अध्यक्ष बेलाल अहमद अन्य सदस्यों के साथ मृतिका के घर पहुंचे. चंदा कर जुटा कर राशि परिजनों को सौंपी. श्री अहमद ने कहा कि पारा शिक्षिका की मौत की जिम्मेवार सरकार है. पिछले तीन माह से मानदेय नहीं मिला.
ऐसे में कोई पारा शिक्षक परिवार चलाये या बीमारी पर पैसे खर्च करे. पैसे के अभाव में ससमय इलाज नहीं होने के कारण शांति की मौत हुई है. मृत पारा शिक्षिका के आश्रितों को मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग की है. साथ ही कहा कि मृतका के छोटे बच्चों के पढ़ाई की जिम्मेवारी सरकार ले. उन्होंने कहा कि मांगे नहीं माने जाने पर सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन शुरू किया जायेगा.
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