प्रकृति की उपासना का प्रतीक है सरहुल: उपायुक्त

Updated at : 21 Mar 2026 9:31 PM (IST)
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प्रकृति की उपासना का प्रतीक है सरहुल: उपायुक्त

जिले में श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाया गया सरहुल

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जिले में श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाया गया सरहुल कोडरमा बाजार. आदिवासियों का प्रमुख त्योहार सरहुल जिले में श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाया गया. जिला मुख्यालय स्थित बिरसा नगर (मरियमपुर ) में आदिवासी संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर की अध्यक्षता में सरहुल महोत्सव का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त ऋतुराज व विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई बालेश्वर मुंडा शामिल हुए. आगंतुक अतिथियों का स्वागत आदिवासी परंपरा के अनुसार कर पगड़ी और पलाश का फूल देकर किया गया. मौके पर उपायुक्त ने कहा कि सरहुल का त्योहार प्रकृति की उपासना और सुंदरता का प्रतीक है. यह त्योहार संताली परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाने का कार्य कर रहा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोग सदियों से जल, जंगल और प्रकृति की रक्षा में अहम भूमिका निभाते चले आ रहे हैं, लेकिन आज भी समाज पूरी तरह से मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पाया है. इसके लिये समाज के प्रबुद्ध लोगों को आगे आने की जरूरत है. ताकि समाज के सभी लोग मुख्यधारा में शामिल हो सके, अपने अधिकार के प्रति जागरूक हो सकें. कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने मांदर, ढोलक समेत अन्य वाद्य यंत्रों का वितरण किया. कार्यपालक अभियंता बालेश्वर मुंडा ने कहा कि सरहुल के आगमन पर प्रकृति अपने नये स्वरूप में नजर आती है, यह पर्व हमें प्रकृति से प्रेम करने और उसकी रक्षा करने का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि मानव समेत सभी जीवों का अस्तित्व तभी तक है, जब तक पेड़-पौधे हैं, जंगल हैं. संघ के अध्यक्ष श्री कुजूर ने कहा कि देश और दुनिया उन्नति के मार्ग पर चल पड़ी है, परंतु आदिवासी समाज मुख्यधारा से कटा हुआ है, जिसके कारण समाज के अधिकतर लोग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं. समाज में शिक्षा और रोजगार की कमी है. इस पर सरकार और जिला प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है, तभी हमारा समाज मुख्यधारा में शामिल होकर आत्मनिर्भर बन सकता है. कार्यक्रम को डॉ विमल प्रसाद, अनिल हांसदा आदि ने भी संबोधित किया. लगभग दो घंटे तक चले उक्त कार्यक्रम के दौरान अंबातरी, ढोढाकोला, नलवा, बेंदी, भीतिया आदि सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आये आदिवासी समाज के युवक-युवतियों ने पारंपरिक परिधान में मांदर की थाप पर एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया. इसके पूर्व लक्खीबागी स्थित सरना स्थल पर पाहन राजेश मुर्मू द्वारा पूजा अर्चना की गयी. तत्पश्चात संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर व अनिल हांसदा आदि के नेतृत्व में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जो लक्खीबागी, कोडरमा बाजार, छोटकीबागी होती हुई कार्यक्रम स्थल पहुंची. शोभायात्रा में शामिल आदिवासी युवक-युवतियां मांदर की थाप पर नृत्य करते हुए चल रहे थे. मौके पर कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई बालेश्वर मुंडा, आदिवासी संघ के जिलाध्यक्ष पवन माइकल कुजूर, सरहुल समिति अध्यक्ष नंदू उरांव, एमवीआई जोसेफ टोप्पो, डॉ विमल प्रसाद, बेंजामिन एक्का, वनमाली मुंडा, रूपेश मुंडा, अनिल हांसदा, हिरामन उरांव, विनोद उरांव, साइमन मरांडी, देवनीश एक्का, ज्योति तिर्की, तारासीयूश कुजूर, उषा कांति लकड़ा, अलमा लकड़ा, रौशनी केरकेट्टा, वाल्टर तिग्गा, स्टीफन सिंह, मिलयानुस कुजूर, तमन्ना कुजूर, शोभा केरकेट्टा, बबलू बिरवा, डेलो मुंडा, कमल हेंब्रम सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.

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