भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने दिया इस्तीफा

Updated at : 05 Jul 2017 9:19 AM (IST)
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भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने दिया इस्तीफा

कोडरमा : भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस संबंध में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को एक पत्र लिख कर इसकी जानकारी दी है. जिलाध्यक्ष के अचानक इस्तीफा देने के बाद सत्तारुढ़ दल भाजपा में पहले से चल रही अंदरुनी गुटबाजी अब खुल कर सामने आ गयी […]

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कोडरमा : भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस संबंध में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को एक पत्र लिख कर इसकी जानकारी दी है. जिलाध्यक्ष के अचानक इस्तीफा देने के बाद सत्तारुढ़ दल भाजपा में पहले से चल रही अंदरुनी गुटबाजी अब खुल कर सामने आ गयी है.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लिखे पत्र में जिलाध्यक्ष ने कोडरमा भाजपा में भयानक गुटबाजी हावी होने की बात कही है. उन्होंने लिखा है कि कुछ कथित बड़े नेता स्वयं को पार्टी से ऊपर मान कर चलते है. उन्हीं नेताओं के कहने पर डोमचांच मंडल अध्यक्ष विनय प्रसाद मोदी, कोडरमा नपं मंडल अध्यक्ष गोपाल कुमार गुतुल, नवलशाही मंडल अध्यक्ष शिवलाल सिंह, चंदवारा मंडल अध्यक्ष द्वारिका राणा जिला कार्यसमिति की बैठकों में नहीं आते हैं और लोगों को भी आने से रोकते है.
अभी तक इन लोगों ने पंडित दीनदयाल कार्य विस्तार योजना का एक भी पत्र जमा नहीं किया है. इतना ही नहीं जब जिला में बैठक होती है, तो इस दिन डोमचांच व नवलशाही की संयुक्त बैठक करते है. वीरेंद्र सिंह ने बिना जिला से पूछे समाचार पत्रों में खबर छपवाने व सोशल मीडिया पर डालने का भी जिक्र किया है. उन्होंने लिखा है कि भाजपा युवा मोरचा के जिलाध्यक्ष की घोषणा होने व मंडल अध्यक्षों की सूची जारी होने के बाद डोमचांच मंडल अध्यक्ष विनय मोदी द्वारा डोमचांच मंडल युवा मोरचा का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया गया. ये सभी काम वहीं नेता कर रहे है, जो कोडरमा सांसद डाॅ रवींद्र राय के साथ रहते और घूमते हैं.
संगठन का काम नहीं होने पर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सौदान सिंह व प्रदेश नेतृत्व के सामने मुझे शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. मुझे जिलाध्यक्ष बने करीब डेढ़ वर्ष हो गये, पर आज तक सांसद ने किसी भी कार्यक्रम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहयोग नहीं किया. जिला संगठन में जो कुछ भी हो रहा है, ऐसा प्रतीत होता है कि यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है. क्योंकि सांसद ने अपने साथ रहने वाले लोगों को कभी कुछ नहीं कहा. सक्रिय सदस्यता शुल्क का हिसाब होने के बहुत समय बाद भी जिला को कुछ नहीं मिला. प्रदेशस्तर से भी किसी भी कार्यक्रम के लिए आज तक जिला संगठन को कुछ नहीं मिला. इस परिस्थितयों में जिलाध्यक्ष बने रहना व कार्यक्रम करते रहना संभव नहीं है. मेरी प्रतिष्ठा व स्वाभिमान दोनों दावं पर है.
इधर, सांसद प्रतिनिधि रामचंद्र सिंह ने कहा है कि जिलाध्यक्ष द्वारा सांसद डाॅ रवींद्र राय पर लगाया गया आरोप पूरी तरह झूठा व मनगढ़ंत है. डाॅ राय ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पूरे राज्य का संगठन चलाया है.
हम सभी संगठन के आदमी है, पर जिला कार्यसमिति में किसी वरिष्ठ नेता को नहीं पूछा जाता और न ही आमंत्रित किया जाता है. जिलाध्यक्ष बैठक में सिर्फ सरकार, सांसद व विधायक के विरुद्ध बोलते रहे है. पार्टी की नीतियों व दीनदयाल विस्तार योजना को लेकर भी वे कुछ खास नहीं कर पाये, इस कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फटकार लगायी थी. पिछले माह संगठन मंत्री ने उन्हें इस्तीफा तक देने को कह दिया था. अगर अब जाकर उन्होंने इस्तीफा दिया है, तो इसमें किसी अन्य पर आरोप लगाना गलत है.
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