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आपातकाल में 13 महीने जेल में थे कड़िया मुंडा

Updated at : 24 Jun 2025 6:16 PM (IST)
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आपातकाल में 13 महीने जेल में थे कड़िया मुंडा

खूंटी के पूर्व सांसद पद्मभूषण कड़िया मुंडा आपातकाल के दौरान 13 महीने जेल में रहे थे.

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खूंटी. खूंटी के पूर्व सांसद पद्मभूषण कड़िया मुंडा आपातकाल के दौरान 13 महीने जेल में रहे थे. उन्हें खूंटी के अनिगड़ा स्थित उनके घर से 11 दिसंबर 1975 को रात के करीब 8ः45 बजे पुलिस गिरफ्तार कर ले गयी थी. जिसके बाद अगले दिन 12 दिसंबर को उन्हें रांची सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया. पूरे 13 महीने जेल में रहने के बाद 1976 में जनवरी में उन्हें रिहा किया गया था. पूरे प्रकरण को याद करते हुए श्री मुंडा बताते हैं कि तब हालात बिल्कुल ठीक नहीं थे. उस दौरान रांची में आंदोलन करने के लिए पहला बैच खूंटी से ही गया था. जिसमें आदिवासी और गैर आदिवासी दोनों शामिल थे. दूसरे बैच में सिर्फ आदिवासी गये थे. इससे प्रशासन सोच में पड़ गयी कि खूंटी में ऐसा कौन है, जो आंदोलन करा रहा है. उन्होंने बताया कि वे अंडरग्राउंड रह कर काम करते थे. इसकी जानकारी प्रशासन को मिल गयी. जिसके बाद 11 दिसंबर 1975 की रात पुलिस उनके घर आयी. तब वे घर में खाना खाकर रेडियो सुन रहे थे. उस वक्त कोई कुजूर डीएसपी हुआ करते थे. उन्होंने कहा कि आपको थाना जाना पड़ेगा. उन्होंने डीएसपी से पूछा कि थाना में कितना देर लगेगा. हम चादर ले लेते हैं. डीएसपी ने कहा कि आप चादर ले लीजिए. कड़िया मुंडा समझ गये कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने परिवार से कहा कि दो से तीन घंटे में अगर मैं वापस नहीं लौटा तो समझना कि मैं जेल चला गया हूं. यह कह कर वे पुलिस के साथ खूंटी थाना चले गये. रात भर खूंटी थाना में रहने के बाद उन्हें अगले दिन सुबह रांची कोतवाली थाना ले जाया गया. जहां रेंज डीआइजी, डीसी और एसपी आये. उन्होंने वारंट तैयार किया और 12 दिसंबर के दोपहर एक बजे जेल भेज दिया गया. कड़िया मुंडा बताते हैं जेल में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई. सभी आंदोलनकारी अलग वार्ड में रहते थे. खाना-पीना भी उनका अलग से था. उन्होंने बताया कि खुदिया पहान, गोमेश्री मानकी, लेमसा मुंडा, गणेश मानकी को भी जेल में डाला गया था. कड़िया मुंडा ने बताया कि आंदोलन के दौरान बहुत कम लोग निकला करते थे. खूंटी से वे लोग रांची जाकर जुलूस और धरना प्रदर्शन करते थे. तब यह तय किया गया था कि पुलिस आने पर किसी को भागना नहीं है, बल्कि सरेंडर कर देना है, क्योंकि भागने पर सीधे गोली मार देने का आदेश था.

आपातकाल पर विशेष

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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CHANDAN KUMAR

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