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खूंटी : भाजपा ने लोगों का हक छीना : हेमंत सोरेन

Updated at : 27 Sep 2019 8:34 AM (IST)
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खूंटी : भाजपा ने लोगों का हक छीना : हेमंत सोरेन

खूंटी : पूर्व मुख्यमंत्री सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि आनेवाले समय में राज्य में आदिवासियों का राज कायम होगा. अलग झारखंड बनने के बाद 16 से 17 साल भाजपा की सरकारें रहीं. इतने सालों में भाजपा ने लोगों का हक छीनने का काम […]

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खूंटी : पूर्व मुख्यमंत्री सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि आनेवाले समय में राज्य में आदिवासियों का राज कायम होगा. अलग झारखंड बनने के बाद 16 से 17 साल भाजपा की सरकारें रहीं. इतने सालों में भाजपा ने लोगों का हक छीनने का काम किया है. श्री सोरेन गुरुवार को कचहरी मैदान में बदलाव यात्रा को संबोधित कर रहे थे. कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास छत्तीसगढ़ से आकर यहां मालिक बन गए हैं.
सरकार जात-धर्म के नाम पर लोगों को लड़वा रही है़ जल, जंगल और जमीन को मिटा रही है़ सरकार ने खूंटी में 50 एकड़ भूमि लैंड बैंक में डाल दिया है़ कहा कि झामुमो की सरकार बनी तो लोगों को तीन लाख वाला आवास दिया जायेगा़ मौके पर विधायक पौलूस सुरीन ने कहा कि झारखंड में अब भी बाहरियों का शासन है़ यहां के लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.
बारिश के बाद भी डटे रहे लोग : कचहरी मैदान में आयोजित सभा में खूंटी व तोरपा से 20 हजार से अधिक लोग पहुंचे थे़ बारिश के बावजूद लोग कचहरी मैदान में जमे रहे. पूरा मैदान छातों से पट गया था़ वहीं हेमंत सोरेन ने छाते से खुद को बचाते हुए भाषण दिया. कार्यक्रम में कई लोगों ने झामुमो की सदस्यता भी ग्रहण की़ इसमें खूंटी के पूर्व उपायुक्त सामसोन सोय भी शामिल थे़
डीजीपी को पत्र लिख कहा : लाठी चलाने वाले पुलिस कर्मियों को करें बर्खास्त
रांची : आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका पर लाठी चार्ज करने से संबंधित मामले में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने डीजीपी केएन चौबे को पत्र लिखा है.
इसमें घटना की शीघ्र जांच करा कर लाठी चार्ज में शामिल पुलिस कर्मियों को बर्खास्त करने की मांग की है. साथ ही घटना स्थल पर मौजूद पुलिस पदाधिकारियों को निलंबित करने को कहा है. श्री सोरेन ने कहा कि इस घटना से पुलिस प्रशासन की छवि धूमिल हुई है. राज्य की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है. मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि राज्य का पुलिस प्रशासन इतना असंवेदनशील क्यों हो गया है.
पत्र में श्री सोरेन ने डीजीपी से कई सवाल किये हैं. पूछा है कि महिला प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति क्यों नहीं की गयी थी? किस परिस्थिति में पुरुष पुलिस बल द्वारा महिलाओं पर बर्बतापूर्वक लाठी बरसायी गयी और लात-घूसों से महिलाओं की पिटाई की गयी? लाठी चार्ज करने के पहले की जाने वाली चेतावनी जैसे वाटर कैनन, आंसू गैस का प्रयोग क्यों नहीं किया गया? लाठी चार्ज से घायल महिलाओं का इलाज क्यों नहीं कराया गया?
बर्बर कार्रवाई के लिए दोषी कौन है? श्री सोरेन ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका पिछले 40 दिनों से राजभवन के सामने अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं. जब सरकार ने उनकी बातें नहीं सुनी तो उन्होंने मुख्यमंत्री आवास जाने के लिए जत्था निकाला. परंतु कुछ दूर जाने पर ही पुलिस के जवानों ने लाठी डंडों से महिलाओं को पीटा. यह घटना वीडियो फुटेज में भी देखने को मिल रही है.
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